नई दिल्ली।वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। जहां एक तरफ यह स्वास्थ्य और समृद्धि से जुड़ी होती है वहीं यह हमारे दैनिक जीवन की दिनचर्या को प्रभावित करती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई के स्थान और उसकी दिशा का सीधा असर हमारे घर की सुख समृद्धि पर पड़ता है। अगर रसोई से जुड़ी कुछ खास नियमों का पालन किया जाए तो घर में नकारात्मक ऊर्जा से बचा जा सकता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
रसोई की सही दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई को घर के दक्षिण पूर्व आग्नेय कोण दिशा में बनवाना सबसे शुभ माना जाता है। दक्षिण पूर्व दिशा में अग्नि का स्वामित्व माना जाता है और यही कारण है कि रसोई के लिए यह दिशा सबसे उपयुक्त मानी जाती है। यहां खाना पकाने से न केवल घर में धन और अन्न की कमी नहीं होती बल्कि यह घर के समृद्धि के मार्ग को भी खोलता है। अगर रसोई का स्थान सही दिशा में नहीं है तो इसके प्रभाव से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। साथ ही घर में आर्थिक तंगी और पारिवारिक विवाद भी हो सकते हैं।
मां अन्नपूर्णा की तस्वीर
हिंदू धर्म में मां अन्नपूर्णा को अन्न की देवी और समृद्धि की प्रतीक माना जाता है। रसोई में मां अन्नपूर्णा की तस्वीर लगाना एक बहुत ही शुभ परंपरा मानी जाती है। इससे न केवल घर में समृद्धि आती है, बल्कि यह भोजन के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक है। यह विश्वास है कि जब हम मां अन्नपूर्णा की पूजा करते हैं, तो घर में अन्न की कोई कमी नहीं रहती और हर व्यक्ति को उचित पोषण प्राप्त होता है।
टूटे-फूटे बर्तन और बेकार सामान
रसोई में हमेशा साफ और सही उपकरण रखें। अगर रसोई में कोई बर्तन टूटा हुआ है या कोई उपकरण खराब हो चुका है, तो उसे तुरंत हटा देना चाहिए। यह न केवल आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा का निर्माण करता है, बल्कि यह आपको वास्तु दोष से भी बचाता है। टूटी-फूटी चीजें घर के वातावरण को गंदा और अस्वस्थ बनाती हैं, जो हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।
जूठे बर्तन रात में नहीं छोड़ें
रसोई में रात के समय जूठे बर्तन छोड़ना भी वास्तु के अनुसार ठीक नहीं माना जाता। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे घर की समृद्धि पर असर पड़ता है। इसके अलावा, यह मां अन्नपूर्णा की नाराजगी का कारण भी बन सकता है, जिससे घर में आर्थिक संकट उत्पन्न हो सकता है। रात को बर्तन धोकर रसोई को साफ रखना अच्छा होता है।
रसोई में प्रकाश और वेंटिलेशन
रसोई में पर्याप्त रोशनी और हवा का आना बहुत जरूरी है। अंधेरे और बंद स्थानों में नकारात्मक ऊर्जा का निर्माण तेजी से होता है। रसोई में खिड़कियां और उचित वेंटिलेशन होना चाहिए ताकि ताजगी बनी रहे। प्राकृतिक रोशनी में खाना पकाना सेहत के लिए भी लाभकारी होता है और यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
रसोई में रंग और सजावट
रसोई के रंगों का भी वास्तु शास्त्र में विशेष महत्व है। रसोई के लिए हल्के पीले, नारंगी, लाल, या गुलाबी रंग उपयुक्त माने जाते हैं। ये रंग ऊर्जा से भरपूर होते हैं और घर में सकारात्मक वातावरण बनाते हैं। रसोई में अत्यधिक गहरे या काले रंगों का प्रयोग न करने की सलाह दी जाती है क्योंकि ये रंग नकारात्मकता को बढ़ावा देते हैं।
आग और पानी का संतुलन
रसोई में अग्नि चूल्हा और जल सिंक का सही संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। चूल्हा और सिंक एक दूसरे के सामने नहीं होने चाहिए, क्योंकि अग्नि और जल एक दूसरे के विपरीत तत्व हैं। इससे घर में झगड़े और विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। इस संतुलन को बनाए रखने से घर में शांति और समृद्धि बनी रहती है।
किचन में खाने का भंडारण
रसोई में खाद्य सामग्री का भंडारण भी वास्तु के अनुसार सही तरीके से किया जाना चाहिए। खाद्य पदार्थों को हमेशा अच्छे से पैक करके और सही स्थान पर रखना चाहिए। इससे घर में समृद्धि का संचार होता है और अन्न की कोई कमी नहीं होती। साथ ही कभी भी पुरानी और खराब खाद्य सामग्री को न रखें।
