नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नवंबर की शुरुआत में 8वें वेतन आयोग (8th CPC) के अध्यक्ष, सदस्यों की नियुक्ति और टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए हैं। इसके बाद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों में वेतन और पेंशन बढ़ोतरी को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
फिटमेंट फैक्टर क्या है
फिटमेंट फैक्टर वेतन और पेंशन संशोधन का आधार होता है। इसे किसी निश्चित फॉर्मूले से नहीं बनाया जाता बल्कि सरकार, वेतन आयोग और आर्थिक कारकों के आधार पर तय किया जाता है। इसमें मौजूदा बेसिक पे, ग्रेड पे, महंगाई दर (CPI), डीए, निजी क्षेत्र के वेतन मानक और सरकार की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखा जाता है।
पिछले वेतन आयोगों का अनुभव-
6वें वेतन आयोग ने बेसिक वेतन पर 1.74 गुणा (बाद में 1.86) सिफारिश की थी।
7वें वेतन आयोग ने 2.57 का समान फिटमेंट फैक्टर अपनाया था, जिसमें 125% डीए और लगभग 14% वास्तविक बढ़ोतरी शामिल थी।
8वें वेतन आयोग का अनुमानित फिटमेंट फैक्टर
विशेषज्ञों और कर्मचारी संगठनों के अनुसार 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.0 से 2.2 के बीच रह सकता है। एनपीएस कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल का अनुमान है कि यह करीब 2.13 हो सकता है। इसमें मौजूदा डीए, अनुमानित डीए वृद्धि, वार्षिक इंक्रीमेंट और महंगाई जैसे कारक शामिल हैं।
कैसे होगा कैलकुलेशन
उदाहरण: 18,000 रुपये बेसिक वेतन वाले कर्मचारी का वेतन 1.83 फैक्टर पर 32,940 रुपये और 2.46 फैक्टर पर 44,280 रुपये तक जा सकता है।
50,000 रुपये बेसिक वाला कर्मचारी 91,500 रुपये से 1.23 लाख रुपये तक नए वेतन दायरे में जा सकता है।
पेंशन पर भी सीधा असर होगा। 2.0 फिटमेंट फैक्टर अपनाने पर 25,000 रुपये के मूल वेतन से रिटायर कर्मचारी का संशोधित मूल वेतन 50,000 रुपये और पेंशन 25,000 रुपये हो जाएगी।
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों को वास्तविक बढ़ोतरी मिल सकती है, लेकिन अंतिम फैसला सरकार की वित्तीय क्षमता और आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेगा।
