लेखक- सुनील शर्मा।
मध्य प्रदेश के गुना जिले में इतिहास और लोककथाओं का एक अनूठा संगम देखने को मिलता है, जिसे बजरंगगढ़ किले के नाम से जाना जाता है। इसे स्थानीय स्तर पर ‘झरकोन’ या ‘झरखोर’ के नाम से भी पुकारा जाता है। चापेट नदी के तट पर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह किला आज भले ही खंडहर अवस्था में हो, लेकिन इसकी दीवारें आज भी बीते युग की गौरवगाथा सुनाती हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और निर्माण
बजरंगगढ़ किले का निर्माण 17वीं शताब्दी के आसपास नंदवंशी यादव राजा जय नारायण सिंह ने करवाया था। इतिहास के पन्नों में यह स्थान ‘चंदेरी सरकार’ के मुख्यालय के रूप में दर्ज है। समय के साथ, इस किले ने कई शासकों का उत्थान और पतन देखा। बाद में, प्रसिद्ध मराठा सेनापति जॉन बैप्टिस्ट ने इस पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया था, जिससे यहाँ की वास्तुकला में मराठा प्रभाव भी देखने को मिलता है।
वास्तुकला और संरचना
यह विशाल किला समुद्र तल से लगभग 303 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और करीब 72 बीघा के विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है। किले की सुरक्षा के लिए इसमें चार मुख्य प्रवेश द्वार बनाए गए थे। किले के परिसर के भीतर स्थित संरचनाएँ इसके समृद्ध अतीत का प्रमाण देती हैं।
मोती महल और रंग महल यहाँ के राजसी ठाठ-बाट के गवाह हैं।
धार्मिक स्थल:- किले के भीतर स्थित राम मंदिर और बजरंग मंदिर (हनुमान मंदिर) आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।
पारस पत्थर की रहस्यमयी किंवदंती
बजरंगगढ़ किला अपनी ऐतिहासिक महत्ता के साथ-साथ एक वलौकिक कहानी के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस किले की किसी दीवार में ‘पारस पत्थर’ (वह पत्थर जो लोहे को सोना बना दे) जड़ा हुआ था। इस अफवाह और धन के लालच में आकर कई लोगों ने समय-समय पर किले की दीवारों और बुर्जों को खोद डाला। यही कारण है कि मानवीय हस्तक्षेप की वजह से इस ऐतिहासिक धरोहर को अत्यधिक नुकसान पहुँचा और यह खंडहर में तब्दील हो गई।
पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य
गुना-आरोन मार्ग पर स्थित यह किला न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक आदर्श स्थान है। पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहाँ से चापेट नदी और आसपास के मैदानी इलाकों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। फोटोग्राफी और ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह एक बेहतरीन गंतव्य है।
कैसे पहुँचें?
स्थान: गुना शहर से लगभग 8 किमी दक्षिण-पश्चिम में।
सड़क मार्ग: गुना से बस, ऑटो या टैक्सी के माध्यम से आसानी से यहाँ पहुँचा जा सकता है।
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन गुना
है, जो देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
वायु मार्ग: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा भोपाल (लगभग 220 किमी) है।
बजरंगगढ़ किला हमें याद दिलाता है कि कैसे उपेक्षा और अंधविश्वास एक महान विरासत को नष्ट कर सकते हैं। यदि आप मध्य प्रदेश की मिट्टी के असली वैभव और उसकी अनकही कहानियों को महसूस करना चाहते हैं, तो एक बार ‘झरकोन’ की इन पहाड़ियों की यात्रा अवश्य करें।
