दफ्तर में सभी अपने अपने काम पर लगे हुए थे, राजेश कुमार भी आकर लग गया था अपने काम में किंतु आज रोज की तरह एकाग्रता नहीं थी …स्फूर्ति नहीं थी..तन्मयता नहीं थी और चंचलता भी नहीं थी ।
राजेश दफ्तर का एकमात्र ऐसा कर्मचारी जो अपने काम के साथ साथ पूरे दफ्तर के साथियों का बातों बातों में इंटरटेनमेंट करता रहता है ।
पूरे दफ्तर में चहलपहल करने वाले अपने साथी को गुमसुम देखकर चिंतित होना स्वाभाविक था ।
राजेश कुमार के सहकर्मी साथी अनिल त्रिपाठी ने राजेश कुमार के कंधे पर हाथ रखकर पूंछ ही लिया-” यार आज क्या बात है कि तुम बिलकुल गुमसुम हो सच बताओ यार क्या दिक्कत है, क्या तकलीफ है हमें बताओ यार हम तुम्हारे साथ हैं । ”
राजेश कुमार ने बात को टालते हुए कहा था – ” नहीं.. नहीं …यार ऐसी कोई बात नहीं है । ”
अनिल त्रिपाठी ने कहा – कोई बात तो है.. तुझे पता है कि आज तूं बुझा बुझा है तो यह दफ्तर भी मरा मरा सा लग रहा है मुझे… ”
अनिल ने फिर प्रश्न किया – “यार राजेश घर परिवार में कोई दिक्कत हो तो बता? ”
“नहीं यार भगवान की कृपा से सब ठीक है” – राजेश कुमार ने स्पष्ट किया।
अनिल त्रिपाठी ने पूंछा-“फिर तेरी रंगत गायब क्यों है ? ”
राजेश कुमार ने अपनी तकलीफ बताई – ” यार पैसे मांगने वाले नातेदार रिश्तेदारों से बहुत परेशान हूँ..
कभी कोई पैसे मांगता है कभी कोई..
मैंने कई बार अपनी जरूरतों को दरकिनार करके सहयोग की भावना से पैसे दे दिए हैं, वापस मांगते हैं तो बुरा मान जाते हैं कहते हैं अभी तुझे क्या जरूरत है । ”
“अब आज सुबह सुबह मौसाजी का फोन आ गया…कह रहे थे -घर में बिटिया की शादी है मैंने तो तेरे भरोसे अच्छे घर में संबंध तय कर दिया है तेरी मौसी को तेरे ऊपर बड़ा गर्व है बड़ा भरोसा है…कहतीं हैं कि हमारी सारी रिश्तेदारों में राजेश ही अच्छी नौकरी में है अच्छा पैकेज है और लड़का भी हीरा है हीरा। ”
अनिल त्रिपाठी ने कहा- वो तो सब ठीक है यार दोस्त …
नातेदार हों, रिश्तेदार हों अथवा यार दोस्त हों अक्सर एक दूसरे की परेशानियों में साथ देते हैं,अगर किसी को कोई दिक्कत होती है, तो दूसरा उसकी मदद के लिए आगे आता है। यार….रिश्ते टिके ही होते हैं विश्वास और सहयोग की नींव पर लेकिन जब इसी विश्वास और सहयोग के बीच पैसों का लेनदेन आ जाता है तो कुछ मुश्किलें आ सकती हैं। ऐसा नहीं कि हमें किसी की आर्थिक मदद नहीं करनी चाहिए….आर्थिक परेशानी में लोग हमेशा परिवार के बाद एक विशेष सहयोगी भावना रखने वाले सहज और सरल व्यक्ति ओर ही रुख करते हैं।”
अनिल अभी बातचीत कर ही रहा था कि राजेश का फोन घनघना उठा…
उसने फोन उठाया तो बात करते करते राजेश का चेहरा बुझा बुझा सा हो गया ।
बात पूरी हुई तो अनिल त्रिपाठी ने पूंछ ही लिया- ” किसका फोन था? ”
राजेश ने कहा- …”वही मौसा जी.. ”
अनिल ने फिर पूंछा- “ऐसा क्या बोल दिया मौसाजी ने कि तेरे चेहरा ही सफेद पड़ गया।”
राजेश ने कहा- “सुबह उधार पैसे मांगने की भूमिका बनाई थी अब उन्होंने अमाउंट भी बता दिया… कह रहे थे कि और तो सब इंतजाम लगभग हो गया है बस तुझे तो चार लाख की व्यवस्था करना है । ”
अनिल ने समझाया- “देख यार… तेरा भी परिवार है तेरे भी बच्चे हैं…
आज तो सब ठीक है कल बच्चों की पढ़ाई का खर्चा बढ़ना है.. अपना घर भी बनाना है कि नहीं या फिर यूँ ही खानाबदोसों की तरह घर ग्रहस्थी का सामान इधर से उधर ढोते रहोगे..
मेरी बात मान इन सब कामों में फंसे रहने से कोई गोल्ड मेडल मिलने वाला नहीं है सिवा कराई.. बुराई के ।”
राजेश और अनिल की वार्तालाप चल ही रही थी कि तभी सुनील शर्मा ने पास बैठते हुए पूंछा- “क्या बात है आज राजेश इतना दुखी क्यों दिख रहा है? ”
अनिल त्रिपाठी ने सुनील को सारी बात बताई तो सुनील ने भी समझाइश देते हुए कहा था –
“अपनी परेशानी दोस्तों से साझा जरूर किया करो और उनकी मदद लेते रहा करो , मैं तो कहता हूँ कि उधार मांगने वाले और उधार देने वाले , दोनों को ही सतर्क रहना चाहिए। उधार मांगने वाले की मजबूरी जानकर लोग उसे पैसे उधार दे देते हैं और उधार मांगने वाला भी विश्वास दिलाता है कि वह जल्द से जल्द उनके पैसे लौटा देगा। हालांकि कई बार कुछ ऐसे भी उधार मांगने वाले होते हैं तो उधार का पैसा वापस लौटाना ही भी भूल जाते हैं बल्कि यों कहें कि बहुत सारे लोग उधार लेते ही हैं वापस न करने के लिए।
उधार मांगने वाले को बुरा न लगे, इस कारण मदद करने वाला शख्स भी पैसों की वापसी की बात नहीं करता। लेकिन बहुत समय बीतने के बाद भी अगर उधार के पैसे वापस नहीं लौटा रहा तो आपको उससे इस बारे में बात करने की जरूरत है। ”
अनिल समझाने के लिए अपने मित्र के सामने कई किस्से और कहानी भी सुना रहा था..
अनिल ने राजेश के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा यार तूं भी जरा सी बात में इतना उलझा है… देख…
अगर तेरा भी कोई ऐसा नातेदार रिश्तेदार या दोस्त है जो पैसे लेने के बाद वापस नहीं लौटा रहा और कोई न कोई बहाना बना रहा है तो सावधानी के साथ कुछ तरीकों को अपनाकर पैसे वापस लेने का प्रयास करता रह …चुप होकर न बैठ।
उधार के पैसे वापस मांगने हों तो उसे खुलकर अपनी जरूरत बताओ और कहो कि आपको पैसों की सख्त जरूरत है,चाहें तो अपनी जरूरत को साबित करने के लिए कोई साक्ष्य भी दिखा सकते हैं ।
राजेश न बीच में ही टोका…यार कुछ ऐसे रिश्तेदार हैं जिनको न तो मना कर पाते हैं और न ही तकादा करने की हिम्मत होती है और कुछ तो ऐसे हैं वापस कर देंगे फिर दस पांच दिन बाद फिर नई उधारी की मांग…
यार मैं तो तंग आ गया हूँ इन लोगों से ……।
अनिल त्रिपाठी ने समझाया…
“ध्यान रख …कि पैसों के लेनदेन की बात आमने सामने किया करें किसी दूसरे के माध्यम से नहीं क्यों कि इसी बात को अपमान समझ बैठते हैं कुछ लोग…और रिश्तों में खटास आना स्वभाविक हो जाता है…. । ”
राजेश कुमार की उंगलियाँ लेपटॉप पर थिरक रहीं थीं और अनिल त्रिपाठी अभी भी अपना लैक्चर झाड़े जा रहा था-” पहली बात तो किसी को इतनी बड़ी रकम नहीं देना चाहिए जिससे हमारा बजट ही गड़बडा़ जाए और यदि देने की भूल कर ही दी है तो जिसे वह वापस करने में सक्षम नहीं है तो उधार के पैसों की वापसी के लिए एक किश्तें तय कर दें आपसी समन्वय के साथ बात करके यह तय करें कि हर महीने कितना पैसा वह लौटा सकता है। ताकि उन पर भी पैसों का बोझ न बढ़े और देर से ही सही, पर पैसों की वापसी हो सके।
सुनील ने कहा- “मैं तो इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ कि हमें ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे हमारी टेंशन बढ़ जाए चाहे वह उधारी लेना हो या देना हो । ”
अब राजेश समझ गया था कि दुनिया बहुत स्वार्थी है, सुख से जीने नहीं देगी।
अनिल ने समझाया -” यार अपना आज और अपना कल सुरक्षित कर यह दुनिया तभी तक तेरी सराहना करेगी जब तक उनके स्वार्थ सिद्ध होते रहेंगे… देखना ये जो तुझे हीरा और हीरो कह रहे हैं न कल तुझे जीरो भी कहने लगेंगे।
टेंशन को आमंत्रित करोगे तो वह तो आयेगी भाई… । ”
शाम के साढ़े छह बजे तो राजेश अपने साथियों के साथ दफ्तर से घर की ओर चल दिया आज वह कुछ हल्का हल्का महसूस कर रहा था।
सतीश श्रीवास्तव
मुंशी प्रेमचंद कालोनी करैरा,जिला शिवपुरी(मध्य प्रदेश)
