प्रवर्तन निदेशालयED ने अदालत में अर्जी लगाकर दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित करने की मांग की थी। विशेष जज एवी गुजराती ने यह नोटिस जारी किया, और न सिर्फ निहाल और नीशाल, बल्कि नीरव मोदी की कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों आदित्य नानावती और संदीप मिस्त्री को भी इसी प्रकार का नोटिस भेजा गया।
PNB घोटाला भारत के बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े मामलों में से एक माना जाता है। हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी और नीरव मोदी पर आरोप है कि उन्होंने बैंक अधिकारियों को रिश्वत देकर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंगLoUs और फॉरेन लेटर्स ऑफ क्रेडिटFLCs के जरिए ₹23,780 करोड़ से अधिक की हेराफेरी की। इस मामले में नीरव मोदी फिलहाल लंदन की जेल में हैं, जबकि मेहुल चोकसी बेल्जियम में प्रत्यर्पण प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
नीरव मोदी के भाइयों पर भी गंभीर आरोप हैं। निहाल मोदी पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी कंपनियों और विदेशी लेनदेन के जरिए करोड़ों रुपए छिपाने में भूमिका निभाई। वे अमेरिका में गिरफ्तार हैं और प्रत्यर्पण प्रक्रिया में हैं। वहीं, नीशाल मोदी दुबई स्थित फर्जी कंपनियों में डमी पार्टनर्स की नियुक्ति और 2011-2013 के दौरान कई फर्जी कंपनियों में सिग्नेटरी या लाभार्थी बने रहने में शामिल थे।
अगर अदालत 7 मई तक उनके संतोषजनक जवाब नहीं पाती है, तो दोनों भाइयों को भगोड़ा घोषित किया जाएगा। भगोड़ा घोषित होने के बाद भारत सरकार उनकी देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों को कुर्क या जब्त कर सकेगी।
नीरव मोदी को 2019 में भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। मेहुल चोकसी के खिलाफ कार्रवाई अभी लंबित है। इस नए नोटिस के साथ मोदी परिवार के लिए कानूनी जाल और सख्त हो गया है। कोर्ट के इस कदम से न केवल संपत्ति जब्ती की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि उनकी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों पर भी कड़ी नजर रखी जा सकेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भारत में बड़े वित्तीय घोटालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का उदाहरण है। इसके साथ ही यह संकेत देता है कि प्रवर्तन एजेंसियां भगोड़ा घोषित करने और अपराधियों की संपत्ति कुर्क करने में तेजी ला रही हैं।
नीरव मोदी और उनके परिवार के खिलाफ यह मामला अब कानूनी रूप से निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है, और आगामी महीनों में इस घोटाले के विभिन्न पहलुओं पर नई कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
