बेसिक से कॉम्प्लेक्स एपीआई की ओर बढ़ता कदम
रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय फार्मा कंपनियां अब कम मार्जिन वाले बेसिक एपीआई से हटकर जटिल और हाई-पोटेंसी एपीआई की ओर रुख कर रही हैं। इसका मकसद है-कीमतों में गिरावट के दबाव को कम करना, मुनाफा बढ़ाना और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा मजबूत करना। विनियमित बाजारों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारतीय कंपनियों की पैठ लगातार गहरी हो रही है, जिससे निर्यात अवसर भी बढ़ रहे हैं।
चीन पर निर्भरता चिंता, लेकिन सुधार के संकेत
रिपोर्ट में प्रमुख कच्चे माल के लिए चीन पर आयात निर्भरता को अभी भी जोखिम माना गया है। हालांकि सरकार की उत्पादन-संबंधी प्रोत्साहन (PLI) योजना और बल्क ड्रग पार्क पहल से हालात में सुधार के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार 30 से अधिक परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और कई कंपनियों ने नई उत्पादन क्षमताएं शुरू कर दी हैं।
बल्क ड्रग पार्क से बदलेगा परिदृश्य
दीर्घकालीन मांग के मजबूत आधार
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जटिल एपीआई परियोजनाओं का पूर्ण व्यावसायीकरण होने और बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होने में अभी 2–4 वर्ष लग सकते हैं। लेकिन संकेत साफ हैं भारतीय एपीआई उद्योग धीरे-धीरे वैल्यू चेन में ऊपर की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसकी भूमिका और मजबूत हो सकती है।
