मंत्रालय के डेटा के अनुसार, फरवरी में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 3.37 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी में यह 2.73 प्रतिशत थी। वहीं, शहरी इलाकों में महंगाई दर फरवरी में 3.02 प्रतिशत रही, जो जनवरी की 2.75 प्रतिशत से बढ़ी है। यह अंतर दर्शाता है कि ग्रामीण इलाकों में महंगाई शहरी क्षेत्रों की तुलना में थोड़ा अधिक रही।
खाद्य महंगाई दर में बदलाव
फरवरी में खाद्य महंगाई दर 3.47 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण इलाकों में यह 3.46 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 3.48 प्रतिशत रही। खासकर, लहसुन (-31.09 प्रतिशत), प्याज (-28.20 प्रतिशत), आलू (-18.46 प्रतिशत), अरहर (-16 प्रतिशत) और लीची (-11.52 प्रतिशत) के दाम सालाना आधार पर सबसे अधिक कम हुए। इससे आम घरेलू बजट पर सकारात्मक असर पड़ा।
वहीं, जिन वस्तुओं के दाम सबसे अधिक बढ़े, उनमें सिल्वर ज्वेलरी (160.84 प्रतिशत), गोल्ड/डायमंड/प्लेटिनम ज्वेलरी (48.16 प्रतिशत), कोपरा (46.16 प्रतिशत), टमाटर (45.29 प्रतिशत) और फूलगोभी (43.77 प्रतिशत) शामिल हैं। ज्वेलरी और कुछ सब्जियों की कीमतों में तेज वृद्धि ने महंगाई के आंकड़ों में अलग रुझान दिखाया।
अन्य सेक्टरों में महंगाई
फरवरी में विभिन्न सेक्टरों में महंगाई दर इस प्रकार रही:
फूड एंड बेवरेज: 3.35 प्रतिशत
पान और तंबाकू: 3.49 प्रतिशत
कपड़े और जूते: 2.81 प्रतिशत
हाउसिंग, पानी, बिजली, गैस और अन्य फ्यूल: 1.52 प्रतिशत
एजुकेशन सर्विसेज: 3.33 प्रतिशत
राज्यों में महंगाई की स्थिति
50 लाख से अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में सबसे अधिक महंगाई वाले पांच राज्य हैं:
तेलंगाना: 5.02 प्रतिशत
राजस्थान: 3.53 प्रतिशत
केरल: 3.50 प्रतिशत
आंध्र प्रदेश: 3.45 प्रतिशत
पश्चिम बंगाल: 3.44 प्रतिशत
डेटा संग्रह और विश्वसनीयता
मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा संगठन (NSO) के फील्ड स्टाफ ने 1407 शहरी बाजारों (ऑनलाइन बाजार सहित) और 1465 गांवों से वास्तविक समय मूल्य डेटा एकत्र किया। फरवरी 2026 के दौरान, 100 प्रतिशत ग्रामीण और शहरी बाजारों से मूल्य एकत्र किए गए, जबकि बाजारवार रिपोर्ट किए गए मूल्य ग्रामीण बाजारों के लिए 99.89 प्रतिशत और शहरी बाजारों के लिए 99.78 प्रतिशत थे।
फरवरी 2026 में महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है, लेकिन लहसुन, आलू, प्याज और अरहर जैसे प्रमुख खाद्य पदार्थों के दामों में गिरावट ने आम जनता को राहत दी। वहीं, ज्वेलरी और कुछ सब्जियों की कीमतों में तेज वृद्धि ने महंगाई में मिश्रित रुझान दिखाया। सरकारी आंकड़ों की व्यापक निगरानी और वास्तविक समय मूल्य डेटा संग्रह से यह सुनिश्चित होता है कि महंगाई की सही स्थिति आम जनता तक पहुंच सके।
