सबसे बड़ा फैसला खरीदी के समय को लेकर लिया गया है। अब सरकारी केंद्रों पर गेहूं की खरीदी सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक की जाएगी, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अधिक समय मिल सकेगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक अवकाश और त्योहारों के दिन खरीदी नहीं होगी।
किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने इस बार समर्थन मूल्य पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा भी की है। इसके साथ गेहूं की प्रभावी खरीदी दर ₹2625 प्रति क्विंटल तय की गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब किसान लागत बढ़ने को लेकर चिंतित थे।
खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार इस वर्ष गेहूं बेचने के लिए किसानों में जबरदस्त उत्साह देखा गया है। 15 मार्च तक कुल 19 लाख 4 हजार 651 किसानों ने पंजीयन कराया, जो पिछले साल के 15 लाख 44 हजार से काफी अधिक है। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि किसान सरकारी खरीदी प्रणाली पर भरोसा जता रहे हैं।
जिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उज्जैन जिले में सबसे अधिक 1,23,281 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इसके बाद सीहोर (1,01,793) और राजगढ़ (98,537) का स्थान है। वहीं दूसरी ओर अलीराजपुर (476), बुरहानपुर (523), पांढुर्णा (863) और अनूपपुर (882) जैसे जिलों में सबसे कम पंजीयन हुआ है।
सरकार का कहना है कि सभी खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। तौल, भुगतान और परिवहन की प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कुल मिलाकर, इस बार की गेहूं खरीदी नीति को किसानों के लिए राहत भरी और सुविधाजनक माना जा रहा है। अब देखना होगा कि जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और किसानों को इसका कितना लाभ मिल पाता है।
