लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि चावल खुद मोटापा नहीं बढ़ाता बल्कि इसे गलत तरीके से खाने या गलत किस्म के चावल चुनने से पाचन पर असर पड़ सकता है और शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। इसलिए चावल खाने से पहले कुछ जरूरी आयुर्वेदिक नियमों को समझना जरूरी है।
आयुर्वेद में चावल की उम्र को बहुत महत्व दिया गया है। आमतौर पर लोग बाजार से नया चावल खरीद कर इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार नया चावल भारी माना जाता है और इसे पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। नया चावल कफ बढ़ा सकता है और पाचन को धीमा कर सकता है। जिन लोगों को अक्सर सुस्ती महसूस होती है या जिनका पाचन कमजोर है उन्हें नया चावल खाने से बचना चाहिए।
इसके विपरीत एक साल पुराना चावल हल्का और सुपाच्य माना जाता है। पुराने चावल की तासीर ऐसी हो जाती है कि वह पेट पर ज्यादा बोझ नहीं डालता और शरीर को जल्दी ऊर्जा देता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संभव हो तो एक साल पुराना चावल ही इस्तेमाल करना चाहिए।
चावल बनाने का तरीका भी सेहत पर असर डाल सकता है। आजकल ज्यादातर लोग कुकर में चावल बनाना पसंद करते हैं क्योंकि इससे समय की बचत होती है। लेकिन आयुर्वेद में कुकर में बने चावल को उतना अच्छा नहीं माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार चावल को खुले बर्तन में ज्यादा पानी के साथ पकाना चाहिए और पकने के बाद उसका माड़ यानी अतिरिक्त पानी निकाल देना चाहिए। इससे चावल हल्का और पचने में आसान हो जाता है।
इसके अलावा आयुर्वेद में शरीर की प्रकृति के अनुसार भी खानपान को महत्व दिया गया है। हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है और उसी के अनुसार चावल खाने का तरीका भी अलग हो सकता है।
जिन लोगों की वात प्रकृति होती है उन्हें अक्सर जोड़ों में दर्द, गैस या त्वचा में रूखापन जैसी समस्याएं रहती हैं। ऐसे लोगों को चावल खाते समय उसमें थोड़ा सा घी मिलाकर खाना चाहिए। इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर को संतुलन मिलता है।
पित्त प्रकृति वाले लोगों को अक्सर एसिडिटी, सीने में जलन या ज्यादा गर्मी महसूस होती है। ऐसे लोगों के लिए दूध के साथ चावल या चावल की खीर खाना फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह शरीर की गर्मी को संतुलित करने में मदद करता है।
वहीं कफ प्रकृति वाले लोगों का वजन जल्दी बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है और उन्हें सर्दी खांसी की समस्या भी हो सकती है। ऐसे लोगों को हमेशा पुराना चावल खाना चाहिए और चावल का माड़ निकाल कर ही सेवन करना चाहिए।
इस तरह सही प्रकार का चावल चुनकर और सही तरीके से पकाकर खाने से न केवल पाचन बेहतर रहता है बल्कि वजन बढ़ने का खतरा भी कम हो सकता है। इसलिए चावल को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसे सही नियमों के साथ खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
