मेटाबॉलिज्म धीमा होने के लक्षण काफी स्पष्ट होते हैं, लेकिन लोग इन्हें सामान्य कमजोरी समझकर टाल देते हैं। इसका सबसे बड़ा संकेत है-बिना किसी खास कारण के वजन का बढ़ना या जिम और डाइटिंग के बावजूद वजन कम न होना। जब शरीर भोजन से पर्याप्त ऊर्जा का उत्पादन नहीं कर पाता, तो व्यक्ति हर समय थकान और कमजोरी महसूस करता है। इसके अलावा, स्लो मेटाबॉलिज्म के कारण त्वचा में रूखापन, बालों का अत्यधिक झड़ना और पाचन संबंधी गंभीर समस्याएं जैसे कब्ज की शिकायत रहने लगती है। इतना ही नहीं, यह स्थिति शरीर की आंतरिक गर्मी पैदा करने की क्षमता को भी कम कर देती है, जिससे व्यक्ति को सामान्य तापमान में भी दूसरों के मुकाबले ज्यादा ठंड महसूस होती है। मानसिक स्तर पर यह ‘ब्रेन फॉग’ पैदा करता है, जिससे एकाग्रता में कमी और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह इंसुलिन रेजिस्टेंस की ओर ले जा सकता है, जो भविष्य में डायबिटीज और थायराइड जैसी बीमारियों का मुख्य कारण बनता है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर मेटाबॉलिक रेट को फिर से कैसे सक्रिय या बूस्ट किया जाए? हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके लिए जीवनशैली में चार बड़े बदलाव जरूरी हैं। सबसे पहले अपनी डाइट में सुधार करें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शरीर में पानी की हल्की सी कमी भी इस प्रक्रिया को धीमा कर देती है। दूसरा महत्वपूर्ण टूल है-स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज। मांसपेशियों के ऊतक Muscle Tissues आराम की स्थिति में भी फैट के मुकाबले अधिक कैलोरी जलाते हैं। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारक है ‘नींद’। अक्सर लोग इसे नजरअंदाज करते हैं, लेकिन अधूरी नींद ब्लड शुगर के स्तर को बिगाड़ती है और भूख को नियंत्रित करने वाले घ्रेलिन और लेप्टिन हार्मोन्स को असंतुलित कर देती है, जिससे मेटाबॉलिज्म पूरी तरह सुस्त पड़ जाता है। हर रात 7-8 घंटे की गहरी नींद शरीर को रिपेयर करने के लिए अनिवार्य है। सही पोषण, नियमित व्यायाम और तनाव मुक्त जीवन के जरिए आप अपने मेटाबॉलिज्म को तेज कर एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
