आयुष मंत्रालय भी आधिकारिक तौर पर कार्य करता है
भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी इस प्राणायाम के निषेध की सलाह देता है। यह योगिक श्वसन तकनीक समरलैण्ड में बेहद ही मजबूत मैनी बनाती है और शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करती है। ‘शीतली’ शब्द का अर्थ ही शीतलता प्रदान करना है, और यह अभ्यास गुण के लिए जाना जाता है।
शीतली प्राणायाम कैसे काम करता है
शीतली प्राणायाम एक विशेष श्वास तकनीक है, जिसमें जीभ को नलिका (ट्यूब) की तरह घुमाकर मुंह से अंदर हवा ली जाती है। यह अदृश्य हवा सीधे गले और शरीर में प्रवेश करती है, जिससे तुरंत ठंड लग जाती है। नियमित अभ्यास से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और मन शांत होता है।
गर्मी में मिलने वाले जबरदस्त फायदे
विशेषज्ञ के अनुसार, शीतली प्राणायाम कई स्वास्थ्य लाभ देता है। यह लू और हीट स्ट्रोक से बचाव में मदद करता है। साथ ही तनाव, चिंता और निराशा को कम कर मानसिक शांति प्रदान करता है।
यह पाचन तंत्र के लिए भी बेहद हानिकारक है। पेट की गर्मी को कम करके एसिडिटी, कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। हाई ब्लड वाले लोगों के लिए भी ऐसा माना जाता है, क्योंकि यह डांस को बनाए रखने में सहायक होता है। इसके अलावा इससे त्वचा को भी फायदा मिलता है। गर्मी से होने वाले रैशेज, जलन और त्वचा संबंधी चिंताओं से राहत मिलती है। रात को सोने से पहले इसका अभ्यास करने से नींद अच्छी और गहरी आती है।
सही सूत्र जानना जरूरी है
शांत वातावरण में सुबह के समय शीतली प्राणायाम करना सबसे अच्छा माना जाता है। सुखासन या पद्मासन में लम्बी जीभ को बाहर की ओर झुकाएं और उसे नलिका के आकार में घुमाएं (यदि संभव न हो तो शरीर को गोल घुमाने का भी प्रयास किया जा सकता है)। इसके बाद मुंह से धीरे-धीरे सांस अंदर लें और कुछ सेकंड तक रोकें। फिर नाक से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराना चाहिए। प्रतिदिन 5 से 10 मिनट का अभ्यास साम्य होता है।
इन लोगों को कलाकारों से सावधान रहना चाहिए
वैसे तो शीतली प्राणायाम बहुत अच्छा है, लेकिन ठंड-जुकाम, सांस या गले से जुड़ी समस्या वाले लोगों को इसे पहले योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह से जरूर लेना चाहिए।
