प्रतिष्ठा का बोझ: पुजारी पिता और ‘राष्ट्रीय सम्मान’ का साया
विवेक तिवारी केवल एक सामान्य युवक नहीं था, बल्कि हारमोनियम वादन में उसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका था।विवेक के पिता गांव के मंदिर में पुजारी हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि विवेक इस बात को लेकर गहरे मानसिक तनाव में था कि उसके ऊपर लगे ‘रेप’ के आरोपों से उसके पुजारी पिता की समाज में प्रतिष्ठा धूमिल हुई है।करीब 6 महीने जेल में रहने के बाद विवेक मात्र 20 दिन पहले ही रिहा हुआ था। घर लौटने के बाद से ही वह गुमसुम और तनावग्रस्त रहने लगा था।यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब नवंबर 2025 में विवेक के खिलाफ उसकी नाबालिग मंगेतर के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ। दोनों परिवारों के बीच सहमति थी कि लड़की के बालिग होते ही दोनों का विवाह कर दिया जाएगा, लेकिन इससे पहले ही मामला पुलिस तक पहुँच गया।
पारिवारिक विवाद
पुलिस कार्रवाई: सुसाइड नोट गायब, कमरा सील
बिलखिरिया टीआई उमेश चौहान के अनुसार, घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।पुलिस ने विवेक के कमरे को सील कर दिया है और एफएसएल (FSL) टीम की मौजूदगी में कमरे की विस्तृत तलाशी ली जाएगी।फिलहाल परिजनों की स्थिति बयान देने योग्य नहीं है। पुलिस जल्द ही उनके और पीड़िता के परिवार के विस्तृत बयान दर्ज कर आत्महत्या के वास्तविक कारणों की पुष्टि करेगी।
