बस एसोसिएशन का आरोप है कि नई नीति के तहत बसों का राष्ट्रीयकरण कर छोटे बस मालिकों को बाहर किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि नई पॉलिसी में परमिट का काम एक ही कंपनी को सौंपा जा रहा है और मल्टीनेशनल कंपनियों के आने से छोटे बस मालिक किराएदार बन जाएंगे। इसके अलावा, निजी बसों के परमिट रद्द कर उन्हें अनुबंध पर चलाने की योजना बनाई जा रही है। बस मालिकों का आरोप है कि सरकार बस संचालकों का शोषण कर उन्हें कमजोर करने पर तुली है।
नई परिवहन नीति में बस संचालन को पूरी तरह डिजिटल मॉनिटरिंग के तहत रखा जाएगा। बसों में अतिरिक्त यात्रियों को बैठने पर पाबंदी रहेगी और ओवरलोडिंग रोकने के लिए चालान का प्रावधान होगा। नीति के अनुसार किसी भी रूट का किराया परिवहन विभाग तय करेगा और बस संचालन के दौरान सरकार का पूरा नियंत्रण रहेगा।
बस मालिकों और सरकार के बीच विवाद के कारण होली पर यात्रियों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। त्योहार के दौरान घर लौटने वाले लोग समय से पहले अपने यात्रा प्रबंध करने को मजबूर हैं, क्योंकि हड़ताल की अनिश्चित अवधि को देखते हुए बसों की उपलब्धता नहीं रहेगी।
