नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार जिले में जनजाति कार्य विभाग में पिछले कुछ समय से शिकायतों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। 181 पर दर्ज होने वाली शिकायतों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि समय पर समाधान न होने से नागरिकों की नाराजगी भी बढ़ी है। इस बढ़ते दबाव को देखते हुए सहायक आयुक्त ने एक कड़ा कदम उठाते हुए कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगाने का निर्णय लिया है, ताकि विभागीय कार्यों में सुधार हो सके और नागरिकों की शिकायतों का त्वरित समाधान हो।
सहायक आयुक्त का यह फैसला विभाग में हलचल मचाने वाला साबित हुआ है। उनका कहना है कि जब तक 181 पर लंबित शिकायतों का सही और संतोषजनक तरीके से समाधान नहीं हो जाता, तब तक किसी भी कर्मचारी का वेतन जारी नहीं किया जाएगा। इस फैसले का असर यह हुआ कि कर्मचारियों ने अब शिकायतों के निपटारे में तेजी दिखानी शुरू कर दी है। शिकायतों के समाधान के लिए कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक शिकायत का सही तरीके से फील्ड और डॉक्यूमेंट स्तर पर सत्यापन करें, जिससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति आए।
यह कदम विभागीय सुधार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों पर इसके नकारात्मक प्रभाव भी दिखाई दिए हैं। कई कर्मचारियों ने अपनी आर्थिक समस्याओं का हवाला देते हुए कहा कि सामूहिक रूप से वेतन रोकने से व्यक्तिगत तौर पर उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वे समझते हैं कि शिकायतों का समाधान जरूरी है, लेकिन इस तरह के कदम से उनका आर्थिक संकट गहरा गया है।
सहायक आयुक्त ने इस कदम के पीछे के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 181 पर लंबित शिकायतें विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं। उनका मानना है कि यदि शिकायतों को समय रहते गंभीरता से निपटाया जाता, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने यह भी माना कि कई शिकायतें फर्जी या तथ्यहीन होती हैं, जो प्रशासन को भ्रमित करने के उद्देश्य से दर्ज की जाती हैं। ऐसे मामलों के समाधान में समय की बर्बादी होती है, जिससे वास्तविक समस्याओं का समाधान विलंबित हो जाता है।
साथ ही, विभागीय स्तर पर यह मांग भी उठने लगी है कि शासन 181 शिकायत प्रणाली के लिए नए नियम बनाए, ताकि गलत या दुरुपयोग वाली शिकायतों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। इससे न केवल प्रशासन पर दबाव कम होगा, बल्कि असली शिकायतों का समाधान भी जल्दी हो सकेगा।
इस फैसले से धार जिले के जनजाति कार्य विभाग में एक ओर गंभीर समस्या भी उभर कर आई है, जिसे अब प्रशासन को हल करना होगा।
