नियमानुसार हाईवे की बेस फिलिंग के लिए मुरम का कोपरा आवश्यक है और नगर निगम का कचरा प्रोसेस कर खाद बनाया जाता है। लेकिन ठेकेदार और निगम के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से रातों-रात सैकड़ों डंपर कचरा हाईवे में फेंका जा रहा है। इस कदम से निर्माण की गुणवत्ता खतरे में है और भविष्य में रोड धंसने और पुल गिरने जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रात को 12 बजे के बाद लगातार कचरा डंप किया जाता है। इससे न केवल सड़क की मजबूती प्रभावित हो रही है बल्कि कचरे से उठने वाली बदबू और गंदगी ने उनके जीवन को भी परेशान कर दिया है। बिलखिरिया के ग्रामीणों ने इसका विरोध जताया है और प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कचरे से बेस फीलिंग करने से सड़क की लाइफ कम हो जाएगी और भारी बारिश या भारी यातायात की स्थिति में सड़क धंस सकती है। पुलों और ओवरब्रिज की मजबूती भी खतरे में पड़ सकती है। इस तरह के भ्रष्टाचार से केवल ग्रामीण ही नहीं बल्कि यात्रियों और पूरे परिवहन तंत्र की सुरक्षा भी प्रभावित होगी।
इस पूरे मामले में ठेकेदारों और निगम के अधिकारियों की मिलीभगत उजागर हुई है। ईमानदार निरीक्षण और सही सामग्री का उपयोग करने में लापरवाही ने हाईवे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर समय पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़े हादसे होने की संभावना है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे इसे अनदेखा नहीं करेंगे और अधिकारियों से सार्वजनिक जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सड़क निर्माण में पारदर्शिता, गुणवत्ता और नियमों का पालन ही लंबे समय तक सुरक्षित हाईवे सुनिश्चित कर सकता है।
