मेला केवल उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा। इस दौरान आमजन को विभिन्न जड़ी-बूटियों और वनोपज के बारे में जानकारी दी जाएगी और उन्हें खरीदने का अवसर भी मिलेगा। मेले में आने वाले पर्यटक और नागरिक वन और पर्यावरण से जुड़े कार्यशालाओं और लाइव डेमोंस्ट्रेशन में भाग लेकर नई जानकारियां हासिल कर सकेंगे। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मेले में देशभर से हर्बल उत्पाद और पारंपरिक ज्ञान की विविधता पेश की जाएगी। यह मेला न केवल व्यापारियों और कारीगरों के लिए अवसर प्रदान करेगा, बल्कि आमजन के लिए भी वन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ने का एक अनूठा मंच बनेगा। साथ ही, इस मेले में युवा और छात्र पर्यावरणीय शिक्षा और आयुर्वेदिक ज्ञान के महत्व को समझने का अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
उज्जैन की यह पहल महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर आयोजित की जा रही है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य पर केंद्रित गतिविधियों का भी संयोजन होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस मेला से जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। पांच दिवसीय मेले में आने वाले नागरिक हर्बल उत्पादों की खरीदारी के साथ-साथ आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा पर आधारित कार्यशालाओं में भाग लेकर अपनी स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ा सकेंगे। वन और पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह मेला एक विशेष अनुभव प्रदान करेगा, जो वन्य जीवन और जैव विविधता के महत्व को सीधे तौर पर समझने का अवसर देगा।
