मामले ने नया मोड़ तब लिया जब कराटे क्लास के बेल्ट ग्रेडिंग कार्यक्रम में जावेद नाम पुकारे जाने पर वही युवक प्रमाण पत्र लेने पहुंचा। युवती को शक हुआ और पूछताछ करने पर उसने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसका असली नाम जावेद अख्तर है और वह महू की हैदराबादी बस्ती का निवासी है। विरोध करने पर आरोपी ने धमकाया और कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
युवती का आरोप है कि दूरी बनाने की कोशिश करने पर आरोपी ने फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाकर उसकी तस्वीरें एडिट कीं और कथित अश्लील फोटो वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए। इन सामग्रियों को उसके रिश्तेदारों और परिचितों तक भेजा गया जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची और मानसिक रूप से प्रताड़ना हुई। 26 फरवरी 2026 को पुराने एबी रोड स्थित खड़े हनुमान मंदिर के पास आरोपी ने कथित तौर पर युवती का हाथ पकड़कर उसे अपने साथ ले जाने की कोशिश की। मौके पर मौजूद व्यक्ति अनिमेश चौरसिया ने बीच बचाव किया तो आरोपी ने उन्हें भी गालियां और जान से मारने की धमकी दी।
शिकायत के अनुसार आरोपी ने युवती पर धर्म परिवर्तन का दबाव भी डाला। घटना के बाद युवती ने परिजनों और सामाजिक संगठनों के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दुष्कर्म धोखाधड़ी धमकी आईटी अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया। उसके मोबाइल सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच जारी है।
पिछले दो वर्षों में मध्य प्रदेश में ऐसे प्रकरणों ने राजनीतिक सामाजिक और कानूनी बहस को जन्म दिया है। भोपाल और इंदौर में कई मामलों में युवतियों को पहले दोस्ती के बहाने फंसाया गया फिर शादी का झांसा देकर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया। कुछ मामलों में सोशल मीडिया और फर्जी नाम के जरिए पहचान छिपाने की शिकायतें सामने आई हैं। उज्जैन और अन्य शहरों में भी ऐसे प्रकरण प्रमुख रहे जहां युवतियों के साथ धोखा देकर ब्लैकमेल किया गया। अदालतों ने कुछ मामलों में सख्त सजा सुनाई है और पुलिस ने आईटी अधिनियम सहित अन्य धाराओं में कार्रवाई की है।
इंदौर जिले में धार्मिक स्वतंत्रता कानून के तहत दर्ज मामलों की संख्या अन्य जिलों की तुलना में अधिक रही है जबकि अनेक प्रकरण न्यायालय में लंबित हैं। ये घटनाएं यह संकेत देती हैं कि डिजिटल ब्लैकमेल फर्जी पहचान और जबरन धर्म परिवर्तन जैसे तत्व स्थानीय स्तर पर गंभीर सामाजिक चुनौती बन गए हैं।
