पटवारी ने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि अगर जांच नहीं हुई, तो कांग्रेस दस्तावेजों के साथ सीबीआई जाएगी। उन्होंने कहा, “सरकार इसे ‘कृषि वर्ष’ कह रही है, जबकि यह ‘कमीशन वर्ष’ है। कल ही सरकार ने 5800 करोड़ का कर्ज लिया, लेकिन यह पैसा किसानों के पास नहीं, बल्कि चहेते ठेकेदारों की जेब में जा रहा है।”
💥 पटवारी के 5 प्रमुख आरोप
टेंडर सिंडिकेट: बड़े टेंडरों में केवल फलोदी और गुप्ता कंस्ट्रक्शन जैसी कंपनियां ही L1 रोटेशन सिस्टम के तहत जीतती हैं। कभी एक कंपनी, कभी दूसरी – प्रतिस्पर्धा खत्म।
दुबई कनेक्शन और मनी ट्रेल: पटवारी ने दो नामों नौशाद और अश्विन नाटू का जिक्र किया। आरोप लगाया कि इन लोगों के साथ मंत्रियों के रिश्तेदारों के दुबई बिजनेस हैं। मामला सीधे मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हो सकता है।
फर्जी बैंक गारंटी: विभाग में ठेकेदार फर्जी बैंक गारंटी जमा कर करोड़ों का एडवांस ले रहे हैं। जल निगम में फर्जीवाड़ा पकड़ने के बाद भी e-BG सिस्टम लागू नहीं किया गया।
भाजपा कार्यालय और केन-बेतवा लिंक: केन-बेतवा प्रोजेक्ट का ठेका उसी कंपनी को मिला जो भाजपा कार्यालय का निर्माण कर रही है। पटवारी ने कहा कि यह पार्टी दफ्तर बनाओ, कमीशन लो और फिर काम करो या रोक दो का खेल है।
तकनीकी धोखाधड़ी: जमीन पर सस्ते HDPE पाइप डाले गए और कागजों में महंगे DI पाइप दिखाकर करोड़ों का भुगतान किया गया।
❓ सवाल और चेतावनी
पटवारी ने पूछा: “नौशाद और अश्विन नाटू कौन हैं?”
सरकार से पूछा कि सभी बैंक गारंटियों की जांच कब होगी।
2023-24 के टेंडरों की न्यायिक जांच अभी तक क्यों नहीं कराई गई?
उन्होंने चेतावनी दी कि 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो सीबीआई शिकायत दी जाएगी।
सिंचाई के रकबे का सरकारी दावा झूठा है, कांग्रेस स्वयं सत्यापन कर सच सामने लाएगी।
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