पटवारी ने भाजपा को चुनौती देते हुए विधायक निर्मला सप्रे के मामले का भी जिक्र किया और कहा कि अगर सरकार में हिम्मत है तो इस मामले में भी निर्णय कराए। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य में सूचना आयोग के खाली पदों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति लंबे समय से लंबित है और सरकार इस मामले में बेहद धीमी गति से काम कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत कर दो सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की मांग भी की।
सिंघार ने पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा से जुड़े मामले और गैस सिलेंडर की कमी एवं महंगाई को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना था कि भाजपा हर मामले में देर से निर्णय लेती है और जनता को राहत देने के बजाय केवल खजाना भरने में लगी है।
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस नेताओं के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें उच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करना चाहिए और अनावश्यक टिप्पणियों से उनकी अज्ञानता उजागर होती है।
यह राजनीतिक वार्ता मध्य प्रदेश में आगामी चुनाव और राज्यसभा सीटों को लेकर बढ़ते तनाव की झलक देती है। विपक्ष और सरकार के बीच जारी इस बहस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिक गई हैं।
Keywords: विजयपुर फैसला, मध्य प्रदेश राजनीति, जीतू पटवारी, उमंग सिंघार, भाजपा, सुप्रीम कोर्ट, निर्मला सप्रे, सूचना आयोग, नरोत्तम मिश्रा, गैस सिलेंडर, महंगाई, आदिवासी विधायक
