संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कौरव ने बताया कि प्रदर्शन 2 फरवरी से शुरू हुआ था। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण बीते दो दिन कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। आज वे संचालनालय स्वास्थ्य सेवाओं से न्याय यात्रा निकालकर अपनी मांगों को राजधानी में प्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे।
पुलिस ने जेपी अस्पताल परिसर में बैरिकेडिंग कर कर्मचारियों को रोकने की तैयारी की है, जबकि कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें न्याय यात्रा निकालने की अनुमति दी गई है।
संघ के अनुसार प्रदेशभर के जिला अस्पताल, सिविल हॉस्पिटल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, संजीवनी क्लिनिक और पोषण पुनर्वास केंद्रों में लगभग 30 हजार आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। ये कर्मचारी रिपोर्टिंग, सफाई, सुरक्षा, कुपोषित बच्चों की देखभाल और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हड़ताल होने की स्थिति में अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत सेवाएं दे चुके आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना शर्त रिक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर समायोजित किया जाए और नियमित किया जाए। साथ ही उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर नीति बनाकर स्थायी समाधान और न्यूनतम 21 हजार रुपये वेतन निर्धारित करने की मांग भी शामिल है।
संघ की 9 सूत्रीय मांगों में वेतन वृद्धि का 11 माह का एरियर भुगतान, निजी आउटसोर्स एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करना, सीधे खाते में वेतन भुगतान, शासकीय अवकाश, नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण, स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी लाभ शामिल हैं। संघ का आरोप है कि दोहरी और दमनकारी नीति के कारण वर्षों से कर्मचारी शोषित हो रहे हैं, जबकि वे 12-14 घंटे तक लगातार कार्य कर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 25 फरवरी 2026 से प्रदेशभर के कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर चले जाएंगे। कर्मचारियों का कहना है कि अब न्याय यात्रा के जरिए सीधे मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की जाएगी और बिना उनके भविष्य की सुरक्षा के स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती संभव नहीं है।
