मध्यप्रदेश में पिछले 72 घंटों से मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ा हुआ है जहां साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ सिस्टम के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाएं बारिश और ओलावृष्टि दर्ज की जा रही है राजधानी भोपाल इंदौर ग्वालियर जबलपुर और उज्जैन सहित लगभग 42 जिलों में मौसम का असर देखा गया है जिससे जनजीवन के साथ किसानों की चिंता भी बढ़ गई है
मौसम विभाग के अनुसार 18 मार्च को सक्रिय हुआ सिस्टम अभी भी प्रभावी बना हुआ है और इसके कारण लगातार मौसम में उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि ने खासकर खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है गेहूं केला पपीता और संतरा जैसी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित बताई जा रही हैं जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है
प्रदेश के कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि का असर देखने को मिला है जहां पिछले 24 घंटों में 100 से अधिक कस्बों और शहरों में वर्षा दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश धार के बदनावर और बैतूल के घोड़ाडोंगरी में दर्ज की गई इसके अलावा बड़वानी बैतूल भोपाल और दमोह सहित कई स्थानों पर आधे इंच से अधिक बारिश हुई है वहीं अलीराजपुर झाबुआ खंडवा छिंदवाड़ा और अन्य जिलों में ओलावृष्टि की सूचना भी सामने आई है
शनिवार को मौसम विभाग ने टीकमगढ़ छतरपुर पन्ना सतना रीवा सिंगरौली मैहर कटनी उमरिया शहडोल डिंडोरी और अनूपपुर सहित कई जिलों के लिए तूफान और बारिश का अलर्ट जारी किया है पूर्वी जिलों पर इस सिस्टम का अधिक असर पड़ने की संभावना जताई गई है जिससे वहां स्थिति और गंभीर हो सकती है
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि तीन ट्रफ और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण प्रदेश में यह अस्थिरता बनी हुई है और यह सिस्टम आगे बढ़ने के साथ असर दिखाता रहेगा हालांकि 22 मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा लेकिन इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कमजोर रहेगा जिससे बारिश की तीव्रता कम हो सकती है
वहीं 26 मार्च के आसपास एक और नया सिस्टम सक्रिय होने की संभावना जताई गई है जिससे प्रदेश में फिर से बारिश का दौर शुरू हो सकता है इस लगातार बदलते मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि कटाई के समय हो रही यह बारिश और ओलावृष्टि फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है मध्यप्रदेश में मौसम का यह दौर किसानों और आम लोगों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है और प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके
