आरटीई के तहत मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए सीटों का आवंटन ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। यह लॉटरी 2 अप्रैल 2026 को निकाली जाएगी। जिन विद्यार्थियों का चयन होगा, उन्हें संबंधित निजी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी समय-सारिणी के अनुसार निःशुल्क प्रवेश के लिए मान्यता प्राप्त अशासकीय स्कूलों और उनमें उपलब्ध सीटों की जानकारी 9 मार्च 2026 से आरटीई पोर्टल पर प्रदर्शित की जाएगी। इसके बाद वंचित समूह और कमजोर वर्ग के अभिभावक 13 मार्च से 28 मार्च के बीच ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन करते समय पात्रता से संबंधित किसी एक आवश्यक दस्तावेज को अपलोड करना अनिवार्य होगा।
ऑनलाइन आवेदन के बाद अभिभावकों को दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। 14 मार्च से 30 मार्च 2026 के बीच संबंधित संकुल केंद्र वाले स्कूल में अधिकृत सत्यापन अधिकारी के माध्यम से दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाएगा। इस दौरान आवेदक अपनी कैटेगरी और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज मूल प्रमाण पत्र के आधार पर सत्यापित करवा सकेंगे।
शिक्षा विभाग का कहना है कि लॉटरी से पहले दस्तावेजों का सत्यापन होने से बाद में स्कूल आवंटन के समय किसी प्रकार की त्रुटि या दस्तावेजों की कमी के कारण प्रवेश निरस्त होने की समस्या नहीं आएगी। इसके साथ ही आवेदन के दौरान अभिभावकों को त्रुटि सुधार का भी मौका दिया जाएगा।
यदि किसी अभिभावक को ऑनलाइन आवेदन करने में समस्या आती है, तो वह अपने क्षेत्र के विकासखंड के बीआरसी कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। वहीं 2 अप्रैल को लॉटरी के माध्यम से छात्रों को स्कूल आवंटित किए जाएंगे। आवंटन की जानकारी आवेदक को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से भी भेजी जाएगी। इसके अलावा लॉटरी की सूची आरटीई पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेगी।
आयु सीमा की बात करें तो नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 कक्षाओं में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 3 वर्ष से 4 वर्ष 6 माह तक तय की गई है। वहीं कक्षा 1 में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु 6 वर्ष से अधिक और 7 वर्ष 6 माह तक होनी चाहिए। नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 के लिए आयु की गणना 31 जुलाई 2026 की स्थिति में की जाएगी, जबकि कक्षा 1 के लिए आयु की गणना 30 सितंबर 2026 के आधार पर होगी। सरकार की इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि वे भी बड़े निजी स्कूलों में पढ़कर बेहतर भविष्य बना सकें।
