हर्षा रिछारिया का नाम देशभर में तब चर्चा में आया जब 4 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में वह निरंजनी अखाड़े की भव्य पेशवाई में संतों के साथ रथ पर सवार दिखाई दीं। उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए और लोग उन्हें ‘महाकुंभ की सबसे सुंदर साध्वी’ कहने लगे। लेकिन इसी प्रसिद्धि के साथ विवाद भी जुड़ गया। कुछ धार्मिक गुरुओं ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि यह “धर्म को प्रदर्शन का हिस्सा बनाना” है और इससे समाज में गलत संदेश फैलता है।
हर्षा ने बताया कि इस लोकप्रियता के बाद उन्हें संत समाज में स्वीकृति नहीं मिली। जब भी वह किसी संत से मिलने जातीं, तो उन्हें घंटों इंतजार कराया जाता। उनके पुराने एंकरिंग पेशे को लेकर उन्हें ‘पाप’ का भाव दिया जाता और उनसे सफाई मांगी जाती।
हर्षा का आरोप है कि कुछ धार्मिक ठेकेदार और संत उनके खिलाफ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। दिसंबर 2025 में माघ मेले में शिविर लगाने के लिए जमीन न मिलने की घटना उन्हें सबसे ज्यादा आहत कर गई। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अधिकारियों ने उन्हें जमीन देने का आश्वासन दिया, लेकिन जैसे ही कुछ प्रभावशाली संतों को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने अधिकारियों पर दबाव बनाया और जमीन आवंटन की प्रक्रिया रोक दी गई। हर्षा ने कहा कि उन्होंने कभी श्रद्धालुओं से एक पैसा नहीं लिया और सारी व्यवस्था अपने खर्च पर चलाती थीं।
अंत में हर्षा ने युवाओं और महिलाओं को सलाह दी कि धर्म से जुड़ने के लिए अपने परिवार और घर के मंदिर तक ही सीमित रहें और किसी के पीछे अंधे होकर न चलें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ धर्म का प्रचार छोड़ा है, सनातन धर्म नहीं। साथ ही कहा कि अगर भविष्य में परिस्थितियां बदलती हैं, तो वह फिर से इस मार्ग पर लौट सकती हैं।
