करीब 30 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार, बावजी की प्रतिमा को गणेश मंदिर की कुई से लाकर जावद के पुरानी धान मंडी क्षेत्र में स्थापित किया जाता है। इसके बाद नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना और मन्नतों का दौर चलता है।
स्थानीय मान्यता है कि यहां पान और नारियल अर्पित कर अर्जी लगाने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं और जल्द ही योग्य जीवनसाथी मिल जाता है। जिस युवक या युवती की शादी की अर्जी लगाई जाती है, उसे चढ़ाया हुआ पान खाना होता है। इसके बाद शीघ्र ही विवाह का रिश्ता तय होने की बात कही जाती है। कई श्रद्धालुओं ने बावजी की कृपा से मनोकामना पूरी होने के उदाहरण साझा भी किए हैं।
बताया जाता है कि करीब 30 वर्ष पहले गणेश मंदिर की कुई की सफाई के दौरान यह प्रतिमा मिली थी। इसके बाद इसे कुई के थारे पर विराजित कर दिया गया और धीरे-धीरे इसकी ख्याति कुंवारों के देवता के रूप में फैलने लगी। आज यह दरबार लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है।
हर साल देश के कोने-कोने से हजारों युवक-युवतियां अपने जीवनसाथी की कामना लेकर बावजी के दरबार में माथा टेकते हैं। नौ दिन तक चलने वाले इस अनोखे उत्सव में पान, नारियल और अर्जी के माध्यम से मनोकामनाएं पूरी होने की उम्मीद के साथ श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। बल्लम बावजी का यह दरबार न केवल विवाह की कामना के लिए बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक भी बन चुका है।
