Gwalior चंबल क्षेत्र में देश में सबसे अधिक लाइसेंसी हथियार जारी होने की बात कही जाती है। अब इस परंपरा में महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार केवल ग्वालियर जिले में ही 30 हजार से अधिक हथियार लाइसेंस जारी हैं जिनमें लगभग 600 लाइसेंस महिलाओं के नाम पर हैं। यह संख्या धीरे धीरे बढ़ती जा रही है जो इस क्षेत्र में बदलती सामाजिक सोच को दर्शाती है।
ग्वालियर शहर के धर्मवीर पेट्रोल पंप क्षेत्र में रहने वाली विद्या देवी कौरव भी उन महिलाओं में शामिल हैं जिनके पास लाइसेंसी हथियार है। उन्होंने बताया कि हथियार रखना उनके लिए शौक नहीं बल्कि आत्मरक्षा का माध्यम है। विद्या देवी बताती हैं कि उनकी शादी के समय पूरा क्षेत्र दस्यु प्रभावित था और सन 1970 के दशक में डकैतों ने उनके पति को दो बार पकड़ लिया था। इन घटनाओं के बाद उनका परिवार सब कुछ छोड़कर ग्वालियर आकर बस गया।
उन्होंने कहा कि उस समय उनके मन में एक सवाल उठा कि यदि घर में पुरुष न हों तो महिलाएं अपनी सुरक्षा कैसे करेंगी। उनका मानना है कि अक्सर यह कहा जाता है कि हथियार पुरुष ही चला सकते हैं लेकिन जब महिलाओं के पास हथियार होंगे ही नहीं तो वे चलाना कैसे सीखेंगी। इसी सोच के साथ उन्होंने लाइसेंसी हथियार लिया।
विद्या देवी का कहना है कि ग्वालियर की धरती वीरता की प्रतीक रही है क्योंकि यहां महान स्वतंत्रता सेनानी Rani Lakshmibai ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। ऐसे में महिलाओं को भी उनसे प्रेरणा लेते हुए आत्मरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए।
ग्वालियर के गोले का मंदिर क्षेत्र में रहने वाली गुड्डी बैस भी पिछले 20 वर्षों से लाइसेंसी हथियार रखती हैं। उनका कहना है कि लोग अक्सर हथियार को शौक से जोड़कर देखते हैं जबकि असल में यह आत्मरक्षा का साधन है। उन्होंने बताया कि एक समय उनके पति पर जानलेवा हमला हुआ था जिसके बाद उन्हें महसूस हुआ कि जरूरत पड़ने पर खुद की और परिवार की सुरक्षा के लिए हथियार होना जरूरी है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार हथियारों के लाइसेंस जारी करने में सुरक्षा और नियमों का पूरा ध्यान रखा जाता है। एसडीएम सीबी प्रसाद के मुताबिक जिले में लाइसेंसी हथियारों की संख्या भले अधिक हो लेकिन उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रशासन सख्त निगरानी रखता है।
ग्वालियर चंबल क्षेत्र की यह बदलती तस्वीर बताती है कि महिलाएं अब केवल घर परिवार तक सीमित नहीं रहीं। वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा के लिए भी तैयार हैं। यह बदलाव न केवल इस क्षेत्र की सामाजिक सोच में परिवर्तन का संकेत है बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा भी बन रहा है।
