हालांकि मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर यह खबर उछली कि शिवसेना के 29 निर्वाचित पार्षदों को फाइव स्टार होटल में शिफ्ट किया गया है लेकिन सूत्रों के अनुसार इसे अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। दरअसल हाल ही में हुए चुनावों में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को मामूली बहुमत मिला और इसी के चलते इन नवनिर्वाचित पार्षदों को अस्थायी सुरक्षा और सुविधाओं के लिए होटल में रखा गया था।राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह कदम किसी षड्यंत्र या नाटकीयता के बजाय पार्षदों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया के सुचारू संचालन के लिए उठाया गया था। इस बीच महापौर पद की सीट को लेकर चर्चा और चर्चाएं लगातार बढ़ रही हैं और सभी की नजरें अब शिवसेना और बीजेपी के आगामी सामंजस्य पर टिकी हुई हैं।
महत्वपूर्ण समितियों में शिवसेना को मिलेगी हिस्सेदारी
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के करीबी सहयोगी ने कहा कि शिवसैनिक चाहते हैं कि बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर पार्टी का अपना महापौर हो। हालांकि शिंदे भी जानते हैं कि बीजेपी इस मांग को स्वीकार नहीं करेगी फिर भी उन्होंने इसे सार्वजनिक चर्चा में लाने में कोई हर्ज नहीं समझा।साथ ही शिंदे यह संदेश देने से बच रहे हैं कि वह पीछे हट गए हैं। उनके मुताबिक पार्टी को कम से कम महत्वपूर्ण समितियों में हिस्सेदारी तो मिलेगी जिससे शिवसेना के निर्वाचित नेताओं की उपस्थिति और प्रभाव बरकरार रहे। इस कदम से राजनीतिक रणनीति और दबाव दोनों बनाए रखने का प्रयास नजर आता है।
शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने साफ किया है कि मुंबई में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को मिले जनादेश का उल्लंघन करने का उनका कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि 29 निर्वाचित शिवसेना पार्षदों को होटल में शिफ्ट करने की चर्चा बेवजह फैलाई जा रही है और इसका उद्देश्य किसी तरह का पाला बदलने से रोकना नहीं है।सूत्रों के अनुसार यह कदम नव निर्वाचित पार्षदों के लिए एक ट्रेनिंग वर्कशॉप का हिस्सा है। शिंदे इस मौके का इस्तेमाल पार्षदों से परिचित होने और उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए कर रहे हैं कि पार्टी उनसे क्या अपेक्षा करती है ताकि आगामी जिम्मेदारियों और महापौर पद के कामकाज को समझा जा सके।
