भारतीय नौसेना के बेड़े में लगभग 20-21 मारक पनडुब्बियां शामिल हैं। इनमें से 17 डीजल-पॉवर्ड अटैक पनडुब्बियां हैं जबकि कम से कम 2 न्यूक्लियर पॉवर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां सक्रिय हैं। इसके अलावा एक पनडुब्बी रूस से लीज पर ली गई है।
सबसे महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि भारत अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन S-4 को अप्रैल या मई तक सेवा में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहली बार सामरिक बल कमान के तहत भारत के पास तीन परिचालन एसएसबीएन हो जाएंगे जो देश की परमाणु समुद्री क्षमताओं को और मजबूत करेंगे।
भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां पश्चिमी तट पर मुंबई और पूर्वी तट पर विशाखापत्तनम के पास तैनात हैं। हाल ही में दो नए पनडुब्बी अड्डे बनाए गए हैं। पहला कारवार मुंबई से 500 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। दूसरा आईएनएस वर्षा पूर्वी तट पर काकीनाडा के पास है जहां भूमिगत पनडुब्बी ठिकाने बनाए गए हैं। इसे चीन के हालिया उन्नयन के जवाब में भारत की नौसैनिक परमाणु क्षमता बढ़ाने की बड़ी परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।
भारत ने फरवरी 2015 में स्वदेशी 6 न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक सबमरींस को अपने बेड़े में शामिल करने की परियोजना को मंजूरी दी थी। ये पनडुब्बियां विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में बनाई जा रही हैं। हालांकि स्वदेशी न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक क्लास की पूरी क्षमता हासिल करना अभी लगभग एक दशक दूर का लक्ष्य है। अनुमान है कि इसकी पहली पनडुब्बी 2036 तक ही बेड़े में शामिल होगी।
भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर है जिसकी सीमा पाकिस्तान से मिलती है। वहीं पूर्वी तट पर बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर हैं जहां चीन के जासूसी जहाज अक्सर गतिविधियां करते रहते हैं। भारतीय पनडुब्बियों का यह जाल दुश्मनों के लिए सिर्फ चेतावनी नहीं बल्कि वास्तविक सामरिक खतरा है। इसमें न्यूक्लियर पॉवर्ड और हमलावर पनडुब्बियां शामिल हैं जो समुद्र में किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। इस प्रकार भारत ने समुद्र के भीतर एक अभेद्य किला तैयार कर लिया है जो न केवल देश की रक्षा करता है बल्कि दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन बनाए रखने में भी निर्णायक भूमिका निभाता है।
