JNU प्रशासन ने इस नारेबाजी को लोकतंत्र और राष्ट्रीय मूल्यों पर हमला करार देते हुए साफ कहा है कि विश्वविद्यालय किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का मंच नहीं बन सकता। प्रशासन की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और पूरे मामले की जांच जारी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़ा है पूरा मामला
दरअसल, यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद शुरू हुआ। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जेल में बंद आरोपियों शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद JNU कैंपस में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए, जिससे देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली। इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
CM देवेंद्र फडणवीस का तीखा बयान
JNU में हुई नारेबाजी पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ा और विवादित बयान दिया है। नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि JNU में लगाए गए नारे देशविरोधी मानसिकता को दर्शाते हैं।
फडणवीस ने कहा, “ये शरजील इमाम की औलादें हैं, जो JNU में पैदा हुई हैं। देशद्रोहियों और देश को तोड़ने की भाषा बोलने वालों के इरादों को कुचलने का काम किया जाएगा।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि देश की एकता और अखंडता के खिलाफ किसी भी सोच को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिवाजी महाराज पर भी दिया बयान
इसी दौरान देवेंद्र फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर भी अहम टिप्पणी की। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटील के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि महापुरुष किसी एक समाज या जाति के नहीं होते।
फडणवीस ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज पूरे देश के थे। उन्हें किसी एक समाज से जोड़ना गलत है। महापुरुषों को बांटना देश के हित में नहीं है।”
JNU विवाद और नेताओं के बयानों के बाद यह मुद्दा अब केवल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा विषय बन गया है।
