वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक अहम निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सोने और चांदी के आधार आयात मूल्य (Base Import Price) में कटौती की घोषणा की है। यह कदम न केवल घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगा, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी सस्ता सोना और चांदी खरीदने का अवसर प्रदान करेगा।
आयात मूल्य में कितनी कमी
केंद्र सरकार ने जारी अधिसूचना में बताया कि सोने के आधार आयात मूल्य में 42 डॉलर प्रति 10 ग्राम की कमी की गई है। वहीं, चांदी के आधार आयात मूल्य में 107 डॉलर प्रति किलोग्राम की कटौती की गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में निरंतर उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से सीमा शुल्क के प्रभावी बोझ में कमी आएगी और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव नहीं बढ़ेगा। इससे आभूषण उद्योग, निवेशकों और सामान्य उपभोक्ताओं—तीनों को लाभ होगा।
क्या होता है ‘आधार आयात मूल्य’?
आधार आयात मूल्य (Base Import Price) वह मानक मूल्य होता है, जिसके आधार पर सरकार सीमा शुल्क (Custom Duty) की गणना करती है। यानी यह वह दर है, जिस पर विदेशी बाजार से आने वाले सोने या चांदी पर कर लगाया जाता है। सरकार हर 15 दिन में इस मूल्य की समीक्षा करती है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें गिरती हैं, तो सरकार आधार मूल्य को घटाकर घरेलू व्यापारियों और उपभोक्ताओं को राहत देती है। वहीं, कीमतों में तेजी आने पर इसे बढ़ाया जाता है ताकि बाजार में अस्थिरता न फैले। आधार मूल्य में कमी से आयातकों को कम कर देना पड़ता है, जिससे सोने-चांदी का आयात सस्ता हो जाता है और घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिलती है।
सोने के आयात में भारत की भूमिका
भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना आयातक देश है। भारतीय उपभोक्ता सोने को सिर्फ आभूषण के रूप में नहीं, बल्कि निवेश और परंपरा के प्रतीक के रूप में भी देखते हैं। शादी-ब्याह, त्यौहार और धार्मिक आयोजनों में सोने की खरीदारी लंबे समय से भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है। देश में हर साल लाखों किलोग्राम सोना आयात किया जाता है, जिसका बड़ा हिस्सा गहनों के निर्माण और निवेश योजनाओं में उपयोग होता है। ऐसे में आयात मूल्य में की गई यह कटौती सीधे तौर पर आभूषण कारोबारियों और ग्राहकों—दोनों के लिए राहत लेकर आई है।
अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं पर प्रभाव
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का यह कदम महंगाई नियंत्रण और विदेशी मुद्रा संतुलन के दृष्टिकोण से भी अहम है। वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बीच यह फैसला घरेलू वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा। साथ ही, त्योहारी सीजन में सोने और चांदी की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कीमतों में कमी से खपत बढ़ने की संभावना है, जिससे गोल्ड ज्वेलरी सेक्टर को प्रोत्साहन मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार का यह कदम सोने-चांदी के बाजार को स्थिर करने के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं के लिए राहतभरी खबर है। आयात मूल्य घटने से जहां व्यापारियों को लाभ होगा, वहीं उपभोक्ता भी कम कीमत पर आभूषण और धातुएं खरीद सकेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि वैश्विक बाजार की अस्थिरता के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतों का संतुलन बनाए रखा जाए और सोने जैसी कीमती धातुओं को आम जनता की पहुंच से दूर न होने दिया जाए।
