नई दिल्ली । सफला एकादशी हिंदू धर्म में एक विशेष महत्व रखती है। यह व्रत हर साल पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है और इसे विशेष रूप से भगवान विष्णु की उपासना के लिए किया जाता है। सफला एकादशी का व्रत साधक के जीवन में सफलता समृद्धि सौभाग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति का कारण बनता है। इस दिन व्रत करने से जीवन की सारी रुकावटें दूर होती हैं और कार्य सिद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
सफला एकादशी 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त
सफला एकादशी 2025 में 14 दिसंबर को रात 8:46 बजे शुरू होगी और इसका समापन 15 दिसंबर 2025 सोमवार की रात 10:09 बजे होगा। इस दिन विशेष रूप से व्रत का पालन किया जाता है, और पूजा के शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है।
सफला एकादशी का महत्व
सफला एकादशी को जीवन में सफलता और समृद्धि पाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इसे तपस्या के समान पुण्य फल देने वाला व्रत बताया गया है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उसके जीवन में सुख शांति और सौभाग्य का वास होता है।
इस दिन व्रत रखने से घर में समृद्धि बढ़ती है और जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को पार किया जा सकता है। सफला एकादशी का व्रत व्यक्ति को न केवल आत्मिक शांति प्रदान करता है बल्कि उसे अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करने में भी मदद करता है। यही कारण है कि इसे एक फलदायी और महत्वपूर्ण एकादशी माना जाता है।
व्रत से पूर्व दशमी तिथि
सफला एकादशी व्रत के पालन से पहले दशमी तिथि को सूर्योदय के बाद सात्त्विक आहार ही ग्रहण करना चाहिए। इस दिन मांसाहार नशा और तामसिक पदार्थों से दूर रहना चाहिए। यह व्रत शुद्ध और पवित्र मन से किया जाना चाहिए ताकि भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
एकादशी के दिन
प्रात समय में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और पीले वस्त्र पीले फूल तुलसी दल धूप दीप अर्पित करें। इस दिन विष्णु सहस्रनाम या भगवद गीता का पाठ करना विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। पूजा में मिठाई केला और पंचामृत का भोग भगवान को अर्पित करें। ध्यान रखें कि एकादशी के दिन चावल का सेवन निषेध होता है। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या धन दान करें ताकि व्रत का पुण्य प्राप्त हो सके।
व्रत पारण द्वादशी तिथि
सफला एकादशी का व्रत द्वादशी तिथि को पारण करने के साथ समाप्त होता है। द्वादशी के शुभ समय में ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान देकर और प्रसाद ग्रहण करके व्रत का समापन करें सफला एकादशी व्रत न केवल भगवान विष्णु की उपासना का अवसर है बल्कि यह जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता पाने का एक पवित्र मार्ग भी है। इस दिन के विशेष व्रत और पूजा विधि को सही तरीके से अपनाने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ दूर होती हैं। इस दिन का पालन करके व्यक्ति अपने जीवन को मंगलमय बना सकता है।
