गुना-शहर के पशुपतिनाथ महादेव मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान श्रद्धालुओं को शिव चरित्र का रसपान कराते हुए कथा व्यास पं. श्रवण भार्गव महाराज ने शिव-पार्वती विवाह और भगवान गणेश के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि शिव विवाह मात्र एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन है।
कथा व्यास ने बताया कि भगवान शंकर को वैराग्य का देवता माना जाता है, लेकिन उन्होंने माता पार्वती से विवाह कर संसार को यह संदेश दिया कि गृहस्थ आश्रम में रहते हुए भी वैराग्य और योग धर्म का पालन किया जा सकता है। उन्होंने तारकासुर वध की पृष्ठभूमि और माता पार्वती की कठिन तपस्या का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे शिव की तंद्रा भंग होने के बाद लोक कल्याण के लिए यह विवाह संपन्न हुआ।
कथा के दौरान भगवान गणेश के प्राकट्य की कथा सुनाते हुए महाराज ने कहा कि माता पार्वती ने अपने योग-बल और उबटन से गणेश की रचना की थी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार बालक गणेश द्वारा द्वार रोके जाने पर शिव का क्रोध और फिर गजमुख लगाकर उन्हें पुनर्जीवित करने की घटना घटित हुई। शिव ने गणेश को बुद्धि के देवता के रूप में स्थापित कर संसार को प्रथम पूज्य देव प्रदान किए।
शिव विवाह के प्रसंग के दौरान मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। कथा के अंत में महाआरती की गई और प्रसाद वितरण हुआ।
