करैरा ब्यूरो | नगर के सुप्रसिद्ध और जन-जन की आस्था के केंद्र, ब्रह्मलीन संत कौशलकिशोर आढ़ाराम बाबा जी की 37वीं पुण्यतिथि इस वर्ष भी परंपरागत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। किला रोड स्थित कायस्थ समाज के प्राचीन मंदिर ‘गंगादास जी’ परिसर में स्थित बाबा की समाधि पर आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय महोत्सव में बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु जुट रहे हैं।
धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा:-
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पुण्यतिथि के अवसर पर तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है:
प्रथम दिन (12 जनवरी): कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत भव्य भक्ति संगीत के साथ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने भजनों पर झूमकर अपनी आस्था प्रकट की।
द्वितीय दिन (13 जनवरी): हनुमत रामायण मंडल द्वारा अखंड रामचरितमानस पाठ का शुभारंभ किया गया। पूरा मंदिर परिसर मानस की चौपाइयों से गुंजायमान हो रहा है।
मुख्य आयोजन (14 जनवरी, बुधवार): बुधवार को अखंड पाठ की पूर्णाहूति के साथ हवन-शांति का आयोजन होगा। इसके पश्चात विशाल भंडारे में साधु-संतों और कन्याओं को भोज कराकर प्रसाद वितरण किया जाएगा। रात्रि के समय भव्य आतिशबाजी आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगी।
राख से बने मंदिर आज भी हैं बाबा के चमत्कार के प्रतीक:-
संत आढ़ाराम जी के प्रति नगरवासियों की अटूट श्रद्धा है। उनके चमत्कारों की चर्चा आज भी हर जुबान पर रहती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा नगर में फेरी लगाते थे और उससे प्राप्त होने वाले पैसों को बच्चों में बांट देते थे। उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनके द्वारा निर्मित वे मंदिर हैं, जिन्हें उन्होंने बिना सीमेंट के केवल राख (भस्म) के उपयोग से बनाया था। ये मंदिर आज भी सुरक्षित हैं और बाबा की आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण देते हैं।
उनके भक्तों में किसी एक समाज के नहीं, बल्कि सभी जाति और धर्मों के लोग शामिल हैं। मान्यता है कि बाबा की समाधि पर सच्ची श्रद्धा से मन्नत मांगने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है।
