शिवपुरी– करैरा के बगीचा वाली माई मंदिर पर आयोजित श्री मद्भागवत कथा के छटवें दिन देवी चित्रलेखा द्वारा भागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन बड़े ही भावनात्मक और आध्यात्मिक तरीके से प्रस्तुत किया।
कथा में दुष्टों के संहार की लीला जिसमें पूतना, शकटासुर, तृणावर्त, वत्सासुर, बकासुर, अघासुर और बाद में कंस जैसे राक्षसों का वध की कथा सुनाई।
बाल सखाओं की लीला:-
देवी चित्रलेखा ने श्रीकृष्ण और उनके बाल सखाओं, जैसे सुदामा, श्रीदामा, और मधुमंगल के बीच की गहरी दोस्ती और नटखट लीलाओं का वर्णन किया। गोचारण (गायों को चराना), खेल-कूद और साथ में भोजन करने जैसी लीलाएं प्रेम और मित्रता के महत्व को दर्शाती हैं।
माखन चोरी:-
माखन चोरी में श्रीकृष्ण के द्वारा गोपियों के घरों से माखन चुराने और यशोदा माँ द्वारा उन्हें डांटने-दुलारने की लीलाओं का वर्णन होता किया। यह प्रसंग भगवान की नटखटता और भक्तों के प्रति उनके सहज प्रेम को दर्शाता है।
महारास लीला:-
कथा में श्रीकृष्ण और गोपियों के बीच दिव्य ‘महारास’ का वर्णन किया। यह कोई साधारण नृत्य नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन का आध्यात्मिक और रहस्यमयी प्रसंग है, जो सांसारिक प्रेम से परे ईश्वरीय प्रेम की पराकाष्ठा को व्यक्त करता है।
देवी चित्रलेखा के द्वारा इन सभी लीलाओं को संगीत और भावपूर्ण प्रवचनों के माध्यम से जीवंत कथा का वर्णन किया, जिससे श्रोतागण भक्ति रस में डूब गए।
