हालांकिलोहे का छल्ला कोई सामान्य आभूषण नहीं है। इसे शनि देव से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील उपाय माना गया है। यदि इसे गलत तरीकेगलत दिन या गलत उंगली में धारण किया जाएतो यह लाभ देने की बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसलिए छल्ला पहनने से पहले इसके नियमों और सावधानियों को जानना बेहद जरूरी है।ज्योतिष और हस्तरेखा शास्त्र के अनुसारहाथ की मध्यमा उंगली का सीधा संबंध शनि ग्रह से होता है। यही कारण है कि लोहे का छल्ला मध्यमा उंगली में ही धारण करने की सलाह दी जाती है। पुरुषों के लिए दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में छल्ला पहनना शुभ माना जाता हैजबकि कुछ विशेष परिस्थितियों में इसे बाएं हाथ में भी पहना जा सकता है। महिलाओं के लिए आमतौर पर बाएं हाथ की मध्यमा उंगली को उपयुक्त माना जाता है।
लोहे का छल्ला पहनते समय पहली बड़ी गलती गलत दिन इसे धारण करना है। शनि से संबंधित कोई भी उपाय शनिवार के दिन ही करना श्रेष्ठ माना गया है। बिना शनिवार के या बिना शनि देव की पूजा-अर्चना के छल्ला पहनना अशुभ परिणाम दे सकता है। छल्ला धारण करने से पहले शनि मंत्र का जाप और सरसों के तेल से दीपक जलाना शुभ फल देता है।दूसरी बड़ी गलती गलत धातु या बाजारू लोहे का उपयोग करना है। ज्योतिष में शुद्ध लोहे या घोड़े की नाल से बने छल्ले को अधिक प्रभावी माना गया है। दिखावे या फैशन के लिए बनाए गए लोहे के छल्ले शनि दोष को शांत करने में सक्षम नहीं होते।
तीसरी और सबसे गंभीर गलती है बिना सलाह के छल्ला पहन लेना। हर व्यक्ति की कुंडली में शनि की स्थिति अलग होती है। कुछ मामलों में शनि शुभ फल भी देता है। ऐसे में बिना ज्योतिषीय परामर्श के लोहे का छल्ला पहनना शनि के शुभ प्रभाव को भी कमजोर कर सकता है।इसलिए यदि आप शनि की साढ़ेसाती ढैय्या या शनि दोष से परेशान हैं और लोहे का छल्ला धारण करना चाहते हैंतो नियमविधि और सही समय का विशेष ध्यान रखें। सही श्रद्धा और विधि से किया गया उपाय ही शनिदेव की कृपा दिला सकता है और जीवन की बाधाओं को कम कर सकता है।
