विदिशा- 27 फरवरी 2026। मध्यप्रदेश की प्राचीन धरोहर उदयगिरि की तलहटी शुक्रवार को भक्ति, परंपरा और रंगोत्सव के अद्वितीय समागम की साक्षी बनी। मध्य प्रदेश प्रांतीय पुजारी महासभा द्वारा आयोजित अमल एकादशी की पारंपरिक परिक्रमा के दौरान ‘रंगभरी ग्यारस’ पर श्रद्धालुओं ने फूलों और गुलाल से भगवान शिव के चरणों में होली अर्पित की।
करीब एक हजार से अधिक भक्तों की उपस्थिति में पूरा परिसर हर-हर महादेव और भजन-कीर्तन की ध्वनियों से गूंज उठा। ढोल-मंजीरों की थाप और पुष्पवर्षा के बीच जब श्रद्धालु रंगों में सराबोर होकर झूमे, तो वातावरण में ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा प्रवाहित हुई मानो ब्रजधाम की अलौकिक होली सजीव हो उठी हो।
परिक्रमा के संचालक संजय राजपुरोहित ने बताया कि रंगभरी एकादशी का पर्व सनातन परंपरा में विशेष स्थान रखता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती के साथ आनंदपूर्वक होली खेली थी। उसी दिव्य प्रसंग को उदयगिरि की पावन भूमि पर प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं ने समरसता, सद्भाव और शांति का संदेश दिया।
उन्होंने बताया कि यह एकादशी परिक्रमा पिछले नौ वर्षों से निरंतर आयोजित की जा रही है और हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। आयोजन के दौरान जामुन के वृक्ष का रोपण भी किया गया, जो धार्मिक चेतना के साथ पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देता है।
आयोजन में भागवत आचार्य रवि कृष्ण सहित अनेक धर्माचार्य, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ परिक्रमा कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
वृन्दावन की होली से आध्यात्मिक जुड़ाव
‘रंगभरी ग्यारस’ की यह होली अपने भाव और उल्लास में वृन्दावन की पारंपरिक होली की याद दिलाती रही। जिस प्रकार ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण और राधा के स्नेह का रंगोत्सव लोकआस्था का केंद्र है, उसी प्रकार यहां शिव-पार्वती के दांपत्य स्नेह का प्रतीक यह आयोजन भक्त और भगवान के मधुर संबंध को अभिव्यक्त करता है।
सनातन धर्म में होली का महत्व
सनातन धर्म में होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक जागरण और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। ‘रंगभरी ग्यारस’ विशेष रूप से शिव-पार्वती के मिलन, पारिवारिक सौहार्द और लोकमंगल की भावना से जुड़ी है।
उदयगिरि की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में आयोजित यह रंगोत्सव न केवल क्षेत्रीय श्रद्धा का केंद्र बना, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक चेतना और भारतीय परंपरा की जीवंतता का प्रभावशाली संदेश भी देता नजर आया।
इस आयोजन में भागवत आचार्य रवि कृष्ण, संजीव शर्मा, विनोद रैकवार, विजय दीक्षित, प्रशांत शर्मा, अरुण अवस्थी, हेमंत पंडित, सोनू सरपंच, सरदार कुशवाहा, चंदन कुशवाहा, बिट्टू शर्मा, कृष्ण दीक्षित, रत्नेश सोनी, नेतराम कुशवाहा, गजेंद्र सिंह राजपूत, रघुवर दयाल उपाध्याय, नाना यादव, हर्ष राय, विकास कुशवाहा, मुकेश खरे, कृष्णा खरे, सौरभ सिंह राजपूत, राजाराम राजपूत, रामगिरी, तुलसीराम साहू, गजेंद्र राजपूत सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
