दरअसल, सनराइजर्स ग्रुप की टीम सनराइजर्स लीड्स ने इंग्लैंड की क्रिकेट लीग द हंड्रेड (The Hundred) 2026 के ऑक्शन में पाकिस्तानी स्पिनर अब्रार अहमद को £190,000 यानी लगभग 2.32 करोड़ रुपये में खरीदा। इस फैसले के बाद गावस्कर ने सोशल मीडिया और अपने कॉलम के जरिए स्पष्ट किया कि यह कदम भारतीय संवेदनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अनुचित है।
गावस्कर ने कहा कि जब कोई भारतीय मालिक किसी पाकिस्तानी खिलाड़ी को पैसा देता है, तो उस राशि का एक हिस्सा टैक्स के रूप में वहां की सरकार को जाता है। यह पैसा अंततः हथियार खरीदने में इस्तेमाल हो सकता है, जिससे सीमा पर भारतीय सैनिकों और नागरिकों की जान को खतरा पैदा होता है। उन्होंने तर्क दिया कि क्या किसी टूर्नामेंट को जीतना भारतीय जिंदगियों की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी है, जिसे दुनिया के केवल कुछ देश खेलते हैं।
पूर्व दिग्गज ने टीम के कोच डेनियल विटोरी पर कोई आरोप नहीं लगाया, लेकिन मालिकों सन टीवी नेटवर्क और काव्या मारन की समझ पर सवाल उठाए। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2008 के मुंबई हमलों के बाद आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बैन लगा हुआ है। दक्षिण अफ्रीका की SA20 लीग में भी सभी टीमों के भारतीय मालिक होने के बावजूद कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं चुना गया। द हंड्रेड में चार अन्य भारतीय मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइजियों ने इस शैडो बैन का पालन किया, लेकिन सनराइजर्स लीड्स इसका अपवाद बन गई।
गावस्कर ने चेतावनी दी कि इस फैसले का असर आगामी आईपीएल सीजन में देखने को मिल सकता है। उनके अनुसार, सनराइजर्स हैदराबाद को अपने घरेलू और बाहरी मैचों के दौरान फैंस के भारी विरोध और प्रदर्शन का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने मैनजमेंट को सुझाव दिया कि अभी भी समय है और वे इस गलती को सुधार सकते हैं, अन्यथा टीम को खिलाड़ियों और प्रबंधन दोनों के लिए मुश्किल हालात का सामना करना पड़ सकता है।
इस विवाद ने टीम के लिए पहले ही से दबाव बढ़ा दिया है। फैंस, पूर्व खिलाड़ी और क्रिकेट विशेषज्ञ इस मामले पर लगातार अपनी राय दे रहे हैं। गावस्कर का गुस्सा केवल एक आलोचना नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है कि क्रिकेट में व्यापारिक निर्णय हमेशा भावनाओं, राष्ट्रीय हित और संवेदनाओं के संतुलन के साथ लेने चाहिए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सनराइजर्स हैदराबाद इस विवाद से कैसे निपटती है और क्या टीम आईपीएल 2026 में अपनी स्थिति को सुरक्षित रख पाएगी।
