बल्लेबाजी बनी सबसे बड़ी चिंता
पूरे टूर्नामेंट में भारत की सबसे बड़ी कमजोरी बल्लेबाजी रही है। पहले ही मैच में अमेरिका के खिलाफ भारतीय बैटिंग ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। महज 77 रन पर टीम ने अपने छह प्रमुख बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए थे। ऐसे मुश्किल समय में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने 84 रनों की जिम्मेदार पारी खेलकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।
हालांकि यह पारी टीम की कमजोरी को ढंकने भर का काम कर सकी, समस्या खत्म नहीं हुई। नामीबिया जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ भी बल्लेबाज संघर्ष करते दिखे। ईशान किशन और हार्दिक पांड्या ने कुछ रन जरूर जोड़े, लेकिन बाकी बल्लेबाजों की धीमी बल्लेबाजी चिंता का कारण बनी। खुद कप्तान सूर्यकुमार यादव 12 रन बनाने में 13 गेंदें खेल गए, जबकि तिलक वर्मा 21 गेंदों पर 25 रन ही बना सके।
बड़े मैचों में भी डगमगाया क्रम
पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में ईशान किशन ने 40 गेंदों में 77 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को संभाला। लेकिन उनके अलावा सिर्फ सूर्यकुमार यादव ही 30 रन का आंकड़ा पार कर सके। उन्होंने 29 गेंदों में 32 रन बनाए, जो उनकी आक्रामक शैली के मुताबिक धीमा प्रदर्शन माना गया।
नीदरलैंड के खिलाफ शिवम दुबे ने 31 गेंदों में 66 रन की तेज पारी खेली, लेकिन यह भी टीम के समग्र प्रदर्शन को स्थिर नहीं कर सकी। ग्रुप स्टेज में छोटी टीमों के खिलाफ खेलने के बावजूद अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा और खुद कप्तान रनों के लिए जूझते नजर आए। इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या भारत का बल्लेबाजी क्रम दबाव में बिखर जाता है?
सुपर-8 में और बढ़ीं मुश्किलें
उम्मीद थी कि सुपर-8 राउंड में भारतीय बल्लेबाज अपने असली रंग में नजर आएंगे, लेकिन कहानी उलटी साबित हुई। साउथ अफ्रीका के खिलाफ मजबूत माने जाने वाले बल्लेबाजी क्रम ने सिर्फ 111 रन बनाए। इस मैच ने टीम की कमजोरियों को फिर उजागर कर दिया।
जिम्बाब्वे के खिलाफ जरूर बल्लेबाजी ने दम दिखाया और भारत ने टी20 विश्व कप में अपना सबसे बड़ा स्कोर बनाया। इससे टीम को आत्मविश्वास मिला, लेकिन निरंतरता की कमी साफ झलकती रही। वेस्टइंडीज के खिलाफ संजू सैमसन ने 97 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई, पर बाकी बल्लेबाज अपेक्षा के अनुरूप योगदान नहीं दे सके।
स्टार खिलाड़ियों से उम्मीदें अधूरी
टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अभिषेक शर्मा से सबसे ज्यादा उम्मीदें थीं, लेकिन वह छह मैचों में सिर्फ 80 रन ही बना सके। तीन मुकाबलों में तो वह खाता तक नहीं खोल पाए। कप्तान सूर्यकुमार यादव, जो अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं, इस टूर्नामेंट में तेज रन बनाने में संघर्ष करते दिखे। उनका स्ट्राइक रेट करीब 135 रहा, जो उनके मानकों के हिसाब से कम है। हार्दिक पांड्या भी बड़े और निर्णायक मौकों पर अपेक्षित योगदान देने में नाकाम रहे। कुल मिलाकर, टीम इंडिया के लिए ईशान किशन ही ऐसे बल्लेबाज रहे, जिनके प्रदर्शन में निरंतरता दिखी।
सेमीफाइनल की चुनौती
अब 5 मार्च को इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भारत को अपनी बल्लेबाजी की कमियों से पार पाना होगा। नॉकआउट मुकाबले में छोटी-सी चूक भी भारी पड़ सकती है। अगर बल्लेबाज सामूहिक रूप से जिम्मेदारी नहीं लेते, तो मजबूत गेंदबाजी के बावजूद टीम मुश्किल में फंस सकती है। भारतीय टीम ने सेमीफाइनल तक का सफर तय कर लिया है, लेकिन खिताब जीतने के लिए बल्लेबाजी को चैंपियन जैसी धार दिखानी ही होगी
