अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “मैंने विराट से सीधे कहा था कि टेस्ट क्रिकेट में उनमें अभी भी क्रिकेट बाकी है। लेकिन सच कहूं तो यह ठीक है। भारत में सोच को लेकर थोड़ी समस्या है। उन्होंने हमेशा टीम को पहले रखा। टीम की जीत उनके लिए सबसे अहम रही। रिटायरमेंट का फैसला उनका है, लेकिन मुझे विश्वास है कि उनमें और क्रिकेट खेलने की क्षमता नियत थी।”
विराट कोहली के टेस्ट से संन्यास लेने के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। उनके लिए 2024-25 का ऑस्ट्रेलिया दौरा चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। वहां ऑफ-स्टंप के बाहर गेंदबाजी पर उनकी कमजोरी सामने आई। लय पाने के लिए कोहली रणजी ट्रॉफी में भी उतरे, लेकिन वहां उम्मीद के मुताबिक रन नहीं बने।
अश्विन ने कहा कि बढ़ती उम्मीदों और मीडिया की सुर्खियों से थोड़ी राहत मिलने के कारण ही कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से दूर जाने का फैसला लिया। उनका टेस्ट करियर शानदार रहा; 123 टेस्ट मैचों में 9,230 रन, 30 शतक और 31 अर्द्धशतक बनाना उनकी क्षमता का प्रमाण है। विराट का सर्वोच्च स्कोर 254 रन रहा।
कप्तानी की भूमिका में भी कोहली ने टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया को बढ़ाया। उनकी कप्तानी में टीम इंडिया दुनिया की सबसे मजबूत टीमों में शामिल हुई। अश्विन ने कहा, “विराट के टेस्ट से संन्यास लेने से रेड-बॉल क्रिकेट का एक शानदार चैप्टर अचानक बंद हो गया।”
आर अश्विन खुद लंबे समय तक विराट के साथ टेस्ट टीम का हिस्सा रहे। अश्विन ने साल 2024 के अंत में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था। कोहली, अश्विन और रोहित शर्मा के संन्यास ने भारतीय क्रिकेट मैनेजमेंट पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। इसने यह दिखाया कि टीम ने ऐसे खिलाड़ी खो दिए जो अभी काफी योगदान दे सकते थे।
अश्विन ने यह भी कहा कि कोहली ने हमेशा टीम को सर्वोपरि रखा और व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा टीम की जीत को महत्व दिया। यही वजह है कि कोहली का टेस्ट क्रिकेट से जाना भारतीय क्रिकेट के लिए दर्दनाक नुकसान है, लेकिन फैंस को टी20 और वनडे फॉर्मेट में उनके शानदार प्रदर्शन का इंतजार रहेगा।
विराट कोहली का टेस्ट करियर न केवल व्यक्तिगत आंकड़ों की वजह से याद किया जाएगा, बल्कि उनके कप्तान के रूप में टीम इंडिया को बढ़ाने देने, दबाव में शांत रहने और खेल की गुणवत्ता बनाए रखने के दृष्टिकोण से भी हमेशा याद रखा जाएगा।
