ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल इस परेड का सबसे बड़ा आकर्षण होगी। भारत-रूस की संयुक्त परियोजना से बनी यह मिसाइल 300 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है और मैक-3 से ज्यादा की रफ्तार से लक्ष्य को भेदती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसने पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस को सटीक हमले में तबाह किया था। इसे दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है।एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम ATAGS भारत की स्वदेशी तोप निर्माण क्षमता का प्रतीक है। DRDO टाटा महिंद्रा और भारत फोर्ज द्वारा विकसित यह 155 मिमी तोप 48 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। पोखरण में इसके सफल परीक्षण हो चुके हैं और आने वाले डेढ़ साल में यह बड़ी संख्या में सेना में शामिल होगी।
ड्रोन शक्ति – ईगल प्रहार सिस्टम भारतीय सेना की नई ड्रोन युद्ध क्षमता को दर्शाता है। यह सिस्टम ड्रोन कंट्रोल स्वार्म ड्रोन सर्विलांस और मौके पर ही ड्रोन रिपेयर की सुविधा देता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक पर खास फोकस किया गया है।मीडियम रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइल MR-SAM दुश्मन के विमानों मिसाइलों हेलिकॉप्टरों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है। हाई रिएक्शन और वर्टिकल लॉन्च इसकी सबसे बड़ी ताकत है। इस सिस्टम ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के कई हवाई हमलों को नाकाम किया था।
आकाश मिसाइल सिस्टम भारत की वायु रक्षा की मजबूत ढाल बन चुका है। करीब 27 किलोमीटर रेंज वाली यह मिसाइल आकाश तीर सिस्टम के साथ मिलकर पश्चिमी मोर्चे पर तैनात रही और दुश्मन के कई हवाई लक्ष्यों को निष्क्रिय किया।दिव्यास्त्र बैटरी और शक्तिबाण रेजीमेंट भारतीय सेना के ट्रांसफॉर्मेशन का प्रतीक हैं। आने वाले समय में भैरव बटालियन दिव्यास्त्र बैटरी और शक्तिबाण रेजीमेंट की संख्या तेजी से बढ़ेगी और हर इन्फैंट्री बटालियन में ड्रोन प्लाटून शामिल किया जाएगा।
रोबोटिक म्यूल्स यानी रोबोटिक खच्चर भविष्य की जंग की तस्वीर पेश करते हैं। ये कुत्ते जैसे दिखने वाले रोबोट पहाड़ी इलाकों में सामान ढोने दुश्मन की पहचान करने और सैनिकों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।77वीं गणतंत्र दिवस परेड भारत की सैन्य शक्ति स्वदेशी हथियारों और आत्मनिर्भर भारत की सोच का जीवंत प्रदर्शन होगी। 29 सैन्य विमानों का फ्लाई-पास्ट भैरव कमांडो और सांस्कृतिक झांकियां इस ऐतिहासिक आयोजन को और भी यादगार बनाएंगी।
