संतोष सांवला बाबा ,दिनारा
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ओरछा बुन्देला वंश के प्रतापी राजा वीर सिंह जूदेव ने अपने शासन काल में 51 तालाब, कुआं ,बावड़ी और महलों का निर्माण बुंदेलखंड क्षेत्र के साथ साथ अन्य तीर्थ स्थलों पर कराया था।
उन्हीं में से एक तालाब का निर्माण दिनारा कस्बा में भी कराया जिसे वीर सरोवर के नाम से जाना जाता है। दिनारा कस्बे में एक ऊंची पहाड़ी है, जिसके एक ओर तलहटी में दिनारा कस्बा आबाद है तो दूसरी ओर तलहटी में वीर सरोवर नामक विशाल जलाशय है जो वर्षा ऋतु में लघुसागर सा प्रतीत होता है।
पहाड़ी की तलहटी में एक नदी धरमू और कासनी नदी एवं पतुआ नाला आकर मिलते थे। इन नदियों और नालों के मिलने के स्थान पर पत्थर-चूने से विशाल ‘पाल’ बनाया गया। पहाड़ी की पनढाल से जलसंग्रहण क्षेत्र विकसित हुआ, इसतरह वीर सरोवर तालाब निर्मित किया गया। पक्के पाल की स्थापत्य कला बेजोड़ है।सैकड़ों सीढ़ियां सरोवर के जल तक पहुंचने का मार्ग खोलती हैं। जो पाल की दीवार पर बनाई गई हैं। पाल के ऊपर बैठने के लिए चूना और पत्थर से निर्मित सुरैई तालाब की सुंदरता और बढ़ा देतीं हैं। इस घाट पर सुरैई होने के कारण ही इसे ‘सुरैई घाट’ के नाम से जाना है।
संवत् 1609 में ओरछा के कुंवर लाला हरदोल के पिता और मधुकर शाह एवं रानी गणेश कुंवर के पुत्र राजा वीर सिंह जिनको इतिहास मे व्रसंग देव के नाम से भी जाना जाता है ,इन्होंने ही दिनारा में विशाल तालाब वंधवाया था, वैसे तो बुन्देला वंश के राजा ने कई तालाब और बॉउड़ियाँ बंधवाने के साथ अपने समकालीन राजाओं में प्रजा के हित में कई स्थाई और महान कार्य किये।
इनके द्वारा तीन तालाव वंधवाये थे जिनके नाम इन्होंने अपने नाम के शुरू के तीन अछरों पर रखे,जिनमें से सबसे पहले और उस समय के उनके राज्य के सवसे बडे तालाव का नाम रखा गया ‘वीर सरोवर’ जो उनके राज्य में वीरपुर नाम का गॉव था जिसे वर्तमान मे दिनारा के नाम से जाना जाता है वर्तमान में यह मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की उतर प्रदेश की सीमा को छूती हुई थाने की सीमा है.यह तालाव अपने समय की कई घटनाओं का साक्षी रहा है।दिनारा के वीर सरोवर तालाब ने भारत के नक्शे को कई बार परिवर्तित होते देखा है।
वर्तमान दिनारा राजा वीरसिंह के समय की तपोस्थली था।
यहां पर राज मन्दिर था जो अपनी सम्पन्ता के लिये उस समय बुंदेलखंड में पहचाना जाता था,वर्तमान समय में उसकी सम्पति को धीरे-धीरे लोगों के द्वारा कब्जा कियाजा रहा है।
उस समय राजा ने दिनारा तालाब के निर्माण के समय की इंजीनियरिंग के कला कौशल की बात करें तो तालाब को बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से चार जगह पर बांधा गया है, जिसमें झॉसी की ओर सोलह द्वारी से लेकर सेंवणी रोड तक, मध्य मे सुरई घाट के नाम से तथा राजघाट किले के नीचे और पुराने दिनारा से लेकर पहाडी तक।
दिनारा तालाव पर बुन्देला शासको के बाल ग्वालियर के सिंधिया राजाओं का कब्जा रहा जो कालांतर में आजादी तक बना रहा।
वर्तमान समय में दिनारा तालाव को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण के समय राजा के मन से इसे अत्यंत ही सुन्दर और मनोहारी स्थल बनवाने की योजना रही होगी लेकिन कालचक्र की नियति कुछ और ही थी सो वक्त ने राजा को वक्त नहीं दिया और राजा वीर सिंह जू देव बुन्देला अपने सपने को पूरा साकार नहीं कर सके,इतिहासकार बताते हैं कि दिनारा तालाव के निर्माण के समय ही वे परलोक सिधार गए।
उस समय जो तालाब बनवाये गए थे उन तालाबों में क्रमश: वीर सरोवर दिनारा ,सिंह सरोवर कुठार और देव सरोवर ओरछा प्रमुख थे। इन तालाबों में सबसे महतत्वपूर्ण और बडा तालाव दिनारा का वीर सरोवर ही था।
लेकिन आज इस ऐतिहासिक तालाब को चारों तरफ से स्वार्थी तत्वों द्वारा अपनी स्वार्थ पूर्ती के लिये कब्जा कर खेती की जा रही है यहां तक कि जानवर भी पानी पीने के लिये भटक रहे हैं।
स्वन्त्रता प्राप्ति के बाद से ही इस तालाब को लेकर कई नेताओं ने नेतागिरी की लेकिन इसके बाद भी तालाव का कुछ भला नहीं हो पाया, शिवराज सिंह चौहान जब मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री थे तब उनके द्वारा तालाब में नहर डालने की बात कही गई हैं और बाद में नहर का उदघाटन होने के वाद भी आज दिनाँक तक नहर तालाब तक नहीं आ सकी, जरा सोचिए कि इससे बडा इस तालाव का दुर्भाग्य और क्या होगा.?
इस तालाब से सिंचाई के लिए आस-पास के ग्रामीण अंचल में नहरों का जाल विकसित किया गया था, जिसमें से दिनारा के अलावा चंदावरा, अवास ,अलगी दावरदेई ,अम्वारी, कूंड़, जनकपुर ,जरगंवा से लेकर दतिया जिले के खदरावनी, राजपुर, सनोरा गांव के कृषक भी लाभान्वित होते हैं।
तालाब के किनारे धार्मिक स्थल भी हैं, जिसमें से प्रमुख रूप से गुप्तेश्वर महादेव मंदिर, वनखंडेश्वर मंदिर, महाकाल आश्रम ,बरिया घाट पर प्राचीन हनुमान मंदिर ,पायलट बाबा निर्मित माता रानी मंदिर, यज्ञशाला स्व. उमा दिवाकर द्विवेदी द्वारा बनवाया गया शंकर जी का मंदिर, गौलोक वासी संत श्री राम-लखन दास जी महाराज द्वारा निर्मित गिर्राज धरण मंदिर, तोरमोदी में रानी घाट पर शंकर जी का मंदिर, इमली माता मंदिर। इस प्रकार से इस सरोवर का धार्मिक महत्व भी बहुत है । तालाब जब खाली होता है तो एक मंदिर जो गौरा पार्वती के नाम से जाना जाता है वह भी दर्शन के लिए सुलभ हो जाता है। कार्तिक मास में जो महिलाएं कार्तिक स्नान करती हैं, वह पूरे तालाब की परिक्रमा करती हैं इस तरह से यह सरोवर ऐतिहासिक सांस्कृतिक धार्मिक एवं किसानों के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण है पर आज अपनी प्राचीन पहचान खोता जा रहा है अगर शासन द्वारा ध्यान दिया जाए तो इस सरोवर को एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है ।
