अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के अनुसार इन हमलों में भारी क्षमता वाले बमों का इस्तेमाल किया गया जो मजबूत और सुरक्षित ठिकानों को भी तबाह करने में सक्षम हैं ये मिसाइल ठिकाने ईरान के तटीय इलाके में स्थित थे और यहां तैनात एंटी शिप मिसाइलें अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए बड़ा खतरा बन रही थीं
होर्मुज स्ट्रेट जिसे वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग माना जाता है इस समय अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया है इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार और तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान के दौरान अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने सैकड़ों लड़ाकू उड़ानें भरी हैं अब तक 28 फरवरी से शुरू हुए इस ऑपरेशन में 7000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं और 6500 से अधिक लड़ाकू उड़ानें भरी जा चुकी हैं
हमलों में कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल साइट एंटी शिप मिसाइल ठिकाने IRGC के मुख्यालय एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य संचार नेटवर्क शामिल हैं
अमेरिका ने इस अभियान में अपनी अत्याधुनिक सैन्य ताकत का व्यापक इस्तेमाल किया है जिसमें बी 1 बी 2 और बी 52 जैसे बमवर्षक विमान एफ 22 और एफ 35 जैसे फाइटर जेट ड्रोन और निगरानी विमान शामिल हैं इसके अलावा समुद्र में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत पनडुब्बियां और मिसाइल से लैस युद्धपोत तैनात किए गए हैं
जमीन पर भी पैट्रियट और थाड जैसे उन्नत मिसाइल रक्षा सिस्टम के साथ रॉकेट आर्टिलरी और एंटी ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे साफ है कि यह ऑपरेशन हवा जमीन और समुद्र तीनों स्तरों पर एक साथ चलाया जा रहा है
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की स्थिति और भी संवेदनशील बनी रह सकती है
