जिस पर विचार किया जा रहा है। क्रेमलिन ने सोमवार को यह जानकारी दी। ‘क्रेमलिन’ (रूस के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों को बताया, ‘‘वास्तव में, राष्ट्रपति पुतिन को भी राजनयिक चैनलों के माध्यम से इस शांति बोर्ड में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम फिलहाल इस प्रस्ताव के सभी विवरणों का अध्ययन कर रहे हैं और सभी विवरणों को स्पष्ट करने के लिए अमेरिकी पक्ष से संपर्क किए जाने की उम्मीद है।’’ कई अन्य देशों को भी अमेरिका से इस संस्था में शामिल होने के प्रस्ताव मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ को भी शांति बोर्ड में शामिल होने का आमंत्रण मिला है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत इस बोर्ड का की शुरुआत की। इजराइल और हमास ने अक्टूबर में ट्रंप की शांति योजना पर सहमति जताई। अमेरिका इस बोर्ड को गाजा और उसके बाहर शांति एवं स्थिरता लाने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय के रूप में पेश कर रहा है, जिससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह अन्य वैश्विक संघर्षों पर भी प्रतिक्रिया दे सकता है।
रूस के ‘चैनल-1 टीवी’ ने सोमवार को अपने राजनीतिक कार्यक्रम ‘प्रयामोई एफिर’ (लाइव ब्रॉडकास्ट) में कहा, ‘‘रूस गाजा शांति बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र संगठन का प्रतिद्वंद्वी बनाने की अमेरिकी कोशिश के रूप में देखता है, जिसका अधिकार क्षेत्र अधिक व्यापक होगा।’’
क्या हैं रूस को आमंत्रण देने के मायने
रूस को आमंत्रण देने के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पदभार ग्रहण करने के बाद से ही वह रूस के प्रति नरमी बरत रहे हैं। वहीं वह यूक्रेन पर रूस से शांति वार्ता के लिए दबाव बना चुके हैं। ऐसे में एक देश पर आक्रमण करने वाले देश को शांति बोर्ड में जगह देने के कई मायने हो सकते हैं। लंबे समय से रूस और अमेरिका के बीच चली आ रही तनातनी के बाद भी यह विदेश नीति में भी बड़ा बदलाव कहा जा सकता है। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूक्रेन से शांति वार्ता करने के लिए राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात भी कर चुके हैं।
