यह परियोजना चीन की राष्ट्रीय विधायिका National People’s Congress की मंजूरी के लिए भेजी गई है। प्रस्तावित राजमार्ग विवादित Aksai Chin क्षेत्र के पास बने उस रणनीतिक मार्ग के समानांतर होगा, जिसे Sino‑Indian War के बाद सैन्य गतिविधियों को तेज करने के लिए तैयार किया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक दुशांजी–कुका राजमार्ग नाम की इस परियोजना को वर्ष 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस योजना में केवल नया राजमार्ग ही नहीं बल्कि Tibet की ओर जाने वाले तीन मौजूदा हाईवे के आधुनिकीकरण का भी प्रस्ताव शामिल है। चीन सरकार का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में बेहतर सड़क नेटवर्क से न केवल सैन्य गतिशीलता बढ़ेगी बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना में तकनीकी क्षेत्रों पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण और उन्नत तकनीकों के विकास को प्राथमिकता दी गई है, ताकि धीमी पड़ रही अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सके। इस योजना को सत्तारूढ़ Chinese Communist Party पहले ही मंजूरी दे चुकी है और अब इसे औपचारिक स्वीकृति के लिए एनपीसी के सामने रखा गया है।
चीन की इन परियोजनाओं ने भारत समेत क्षेत्र के कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले चीन ने Brahmaputra River पर तिब्बत में दुनिया के सबसे बड़े बांध के निर्माण की शुरुआत भी की थी। करीब 170 अरब डॉलर की लागत वाली इस परियोजना से नदी के प्रवाह और जल संसाधनों को लेकर भारत और Bangladesh में भी चिंता जताई गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा के पास चीन के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक महत्व भी रखते हैं, जिससे आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर असर पड़ सकता है।
