नई दिल्ली। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उनके सहयोगी लगातार आवाज उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर अब अवामी लीग के नेता और शेख हसीना सरकार के पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चौधरी ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश के व्यवसायी मोहम्मद यूनुस देश को गृहयुद्ध की ओर धकेलना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शेख हसीना को पूरी न्यायिक प्रक्रिया में अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया और यह फैसला पहले से ही तय था।
चौधरी का बयान – ‘सब कुछ ड्रामा था’
चौधरी ने मीडिया से बातचीत में यह दावा किया कि शेख हसीना का ट्रायल पूरी तरह से एक ड्रामा था, जो पहले से लिख दिया गया था। उन्होंने कहा, “शेख हसीना को पता था कि यह फैसला कभी लागू नहीं किया जा सकता।” चौधरी ने यह भी बताया कि पिछले महीने से ही बांग्लादेश ट्रिब्यूनल के चेयरमैन कोर्ट में उपस्थित नहीं थे, और उनके मुताबिक, ट्रिब्यूनल का संविधान भी अवैध था। उनका यह भी कहना था कि अंतरिम सरकार को ट्रिब्यूनल के कानून में किसी प्रकार का बदलाव करने का अधिकार नहीं था।
हसीना के ट्रायल में स्टैंडर्ड प्रोसीजर का उल्लंघन
मोहिबुल हसन चौधरी ने यह आरोप भी लगाया कि मोहम्मद यूनुस की सरकार ने शेख हसीना के ट्रायल के दौरान मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा, “हमें अपना वकील रखने की भी अनुमति नहीं दी गई। ढाका के कई वकील शेख हसीना का केस लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया। ऐसे में, शेख हसीना का प्रतिनिधित्व तक नहीं हो पाया।” चौधरी ने इस बात को भी रेखांकित किया कि इस प्रकार का न्यायिक व्यवहार लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
यूनुस सरकार को चुनौती
मोहिबुल हसन चौधरी ने यूनुस सरकार को चुनौती दी कि अगर वे खुद को इतना मजबूत समझते हैं, तो क्यों नहीं उन्हें चुनाव में भाग लेने की अनुमति दी जा रही है? उन्होंने कहा, “अवामी लीग को बांग्लादेश में भारी समर्थन हासिल है। यह पार्टी साल 1975 से ऐसी परिस्थितियों का सामना कर रही है। पहले भी हमारे ऊपर प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन हम धूल से उठकर खड़े हुए हैं। इस बार भी हम ऐसा ही करेंगे।”
अवामी लीग पर प्रतिबंध
मोहिबुल हसन ने यह भी बताया कि यूनुस सरकार ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है और पार्टी को बांग्लादेश में चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। ऐसे में, उन्होंने यह सवाल उठाया कि अगर यूनुस सरकार को अपने समर्थकों पर विश्वास है, तो क्यों उन्हें चुनाव में भाग लेने की इजाजत नहीं दी जा रही।
चौधरी के बयान ने बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। वह शेख हसीना की पार्टी के समर्थन का दावा करते हुए यह संदेश देना चाहते हैं कि अवामी लीग अपनी जड़ें मजबूत रखेगी, चाहे कोई भी परिस्थिति हो। बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक संकट में यह बयान एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है
