वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने गाजा पट्टी (Gaza Strip) में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण, शासन और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय निकाय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) (New International Body, ‘Board of Peace’) की स्थापना की घोषणा की है। ट्रंप खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। वाइट हाउस ने शुक्रवार को इस बोर्ड के संस्थापक कार्यकारी सदस्यों की सूची जारी की, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनेर और अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।
यह बोर्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य इजरायल-हमास संघर्ष को समाप्त करना, गाजा में स्थायी शांति स्थापित करना, पुनर्निर्माण करना और समृद्धि लाना है। योजना के दूसरे चरण में प्रवेश हो चुका है, जिसमें हमास द्वारा शासन छोड़ने, पूर्ण हथियार डालने और एक तकनीकी फिलिस्तीनी प्रशासन की स्थापना शामिल है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिकी निगरानी में गाजा को शासित करने वाली फिलिस्तीनी तकनीकी समिति की पहली बैठक शुक्रवार को मिस्र की राजधानी काहिरा में आयोजित की गई। इस समिति के प्रमुख अली शाथ हैं जो गाजा से ताल्लुक रखने वाले इंजीनियर और पूर्व फिलिस्तीनी अथॉरिटी अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि समिति जल्द से जल्द काम शुरू करेगी। उन्होंने माना कि गाजा के पुनर्निर्माण और पुनर्बहाली में लगभग तीन साल का समय लग सकता है। फिलहाल उनकी प्राथमिकता तत्काल जरूरतों पर रहेगी, जिनमें लोगों के लिए अस्थायी और स्थायी आश्रय की व्यवस्था शामिल है। मिस्र के सरकारी चैनल Al-Qahera News को दिए इंटरव्यू में अली शाथ ने कहा- फिलिस्तीनी लोग इस समिति के गठन और कामकाज की लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे, ताकि उन्हें इस तबाही से उबारा जा सके।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप गाजा में शासन व्यवस्था संभालने के लिए इस तकनीकी समिति के प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। 10 अक्टूबर को संघर्षविराम लागू होने के बाद इजरायली सेना गाजा के कुछ हिस्सों से पीछे हटी, जिसके चलते हजारों विस्थापित फिलिस्तीनी अपने तबाह हो चुके घरों की ओर लौटे। हालांकि आगे की राह आसान नहीं मानी जा रही है। सबसे बड़ी चुनौतियों में संघर्षविराम की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती और हमास को निरस्त्र करने जैसी संवेदनशील प्रक्रिया शामिल है।
ट्रंप की योजना के तहत, गाजा में रोजमर्रा के प्रशासन का काम अली शाथ की तकनीकी समिति करेगी, जबकि उसकी निगरानी ट्रंप के नेतृत्व में बनने वाला एक उच्चस्तरीय ‘बोर्ड ऑफ पीस’ करेगा। फिलहाल इस बोर्ड के सभी सदस्यों की घोषणा नहीं की गई है।
वाइट हाउस ने घोषित किए बोर्ड के सदस्य
व्हाइट हाउस के बयान के अनुसार, बोर्ड ऑफ पीस के संस्थापक कार्यकारी बोर्ड में सात सदस्य शामिल हैं:
अध्यक्ष: डोनाल्ड ट्रंप (अमेरिकी राष्ट्रपति)
मार्को रुबियो (अमेरिकी विदेश मंत्री)
जेरेड कुशनेर (ट्रंप के दामाद और पूर्व सलाहकार)
स्टीव विटकॉफ (मध्य पूर्व के लिए अमेरिकी विशेष दूत)
सर टोनी ब्लेयर (पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री)
अजय बंगा (विश्व बैंक के अध्यक्ष)
मार्क रोवन (अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ)
रॉबर्ट गेब्रियल (अमेरिकी उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार)
अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियां
निकोलाय म्लादेनोव (बुल्गारियाई राजनेता और पूर्व यूएन मध्य पूर्व दूत) को गाजा के लिए हाई रिप्रेजेंटेटिव नियुक्त किया गया है, जो बोर्ड की ओर से जमीन पर काम करेंगे। अमेरिकी मेजर जनरल जास्पर जेफर्स को इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) का कमांडर बनाया गया है, जो सुरक्षा स्थापित करने, शांति बनाए रखने और आतंक-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होगा। गाजा में दैनिक प्रशासन के लिए नेशनल कमिटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) गठित की गई है, जिसके प्रमुख फिलिस्तीनी इंजीनियर और पूर्व मंत्री अली शाथ हैं। यह तकनीकी और गैर-राजनीतिक समिति हमास के स्थान पर सार्वजनिक सेवाएं संचालित करेगी।
ट्रंप की यह योजना पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई थी, जिसके तहत बचे हुए बंधकों की रिहाई और युद्धविराम हुआ। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नवंबर 2025 में प्रस्ताव 2803 पारित कर इस योजना और बोर्ड को समर्थन दिया। हालांकि, टोनी ब्लेयर की नियुक्ति विवादास्पद है, क्योंकि इराक युद्ध (2003) में उनकी भूमिका के कारण मध्य पूर्व में वे विभाजनकारी व्यक्तित्व माने जाते हैं। ट्रंप ने पिछले साल अक्टूबर में कहा था कि वे ब्लेयर को पसंद करते हैं, लेकिन उनकी स्वीकार्यता जांचेंगे।
कई विशेषज्ञों और अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस बोर्ड को औपनिवेशिक संरचना जैसा बताया है, क्योंकि एक विदेशी नेता (ट्रंप) किसी अन्य क्षेत्र के शासन की निगरानी कर रहा है। फिलिस्तीनी गुटों और हमास की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन योजना के तहत हमास ने शासन छोड़ने पर सहमति जताई है, हालांकि निरस्त्रीकरण पर असहमति बनी हुई है।
