कैरोलाइन लैविट ने बताया कि भारत एक भरोसेमंद सहयोगी रहा है और मुश्किल समय में हमेशा जिम्मेदारी से कदम उठाता है। इस शॉर्ट टर्म फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध के कारण बढ़ती वैश्विक तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर न डालें।
व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया कि इस छूट से रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा क्योंकि यह तेल पहले से समुद्र में मौजूद जहाजों में था। नेशनल सिक्योरिटी टीम और ट्रेजरी सेक्रेटरी की जांच के बाद ही यह निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया।
28 फरवरी से बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज की खाड़ी में युद्ध की घटनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं। ऐसे कठिन दौर में अमेरिका का यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और घरेलू तेल आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय वैश्विक तेल संकट और तेल निर्यातकों की बदलती स्थिति के बीच भारत के लिए समयबद्ध राहत साबित होगा। भारत ने पहले रूसी तेल की खरीद पर रोक लगाई थी लेकिन यह छूट अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति संकट के मद्देनजर अस्थायी उपाय के रूप में दी गई है।
