रायसीना डायलॉग की बढ़ती वैश्विक अहमियत
टोनी एबॉट ने कहा कि 2016 से हर साल मार्च में नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग आयोजित किया जाता है। यह विचार भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बताया गया, जो लंबे समय तक भारत के विदेश मंत्री रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह कॉन्फ्रेंस राजनीतिक नेताओं, सैन्य अधिकारियों, उद्योगपतियों, पत्रकारों और थिंक टैंक के कार्यकर्ताओं को वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करता है। एबॉट के अनुसार इस कॉन्फ्रेंस में कई वजहों से वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सालाना मीटिंग से भी अलग है, क्योंकि यह केवल होस्ट सरकार की तारीफ तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खुली चर्चा को बढ़ावा देता है।
मोदी के नेतृत्व की शैली की तारीफ
एबॉट ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं, लेकिन इसके बावजूद वे दूसरों की बात सुनने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने बताया कि रायसीना डायलॉग के उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री मोदी अक्सर मुख्य अतिथि को सुनते हैं और खुद भाषण देने से भी परहेज करते हैं। यह नेतृत्व की विनम्र शैली का उदाहरण है।
लोकतंत्र को लेकर आलोचनाओं को गलत बताया
टोनी एबॉट ने उन अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं को भी खारिज किया जिनमें कहा जाता है कि भारत में लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उन्होंने कहा कि जिस देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, स्वतंत्र मीडिया और मजबूत न्यायपालिका हो, वहां तानाशाही का खतरा नहीं हो सकता। एबॉट ने यह भी कहा कि रायसीना डायलॉग जैसे मंच इस बात का प्रमाण हैं कि भारत में खुली बहस और विचारों का हेरफेर-तत्व संभव है।
