नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर डेनमार्क और उसके सहयोगी यूरोपीय देशों को सीधी चेतावनी दे डाली। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की शर्तों पर समझौता नहीं हुआ, तो यूरोप को भारी आर्थिक कीमत चुकानी होगी। इसके जवाब में यूरोपीय संघ EUने भी अपने इतिहास के सबसे घातक आर्थिक हथियार ‘एंटी-कोर्शन इंस्ट्रूमेंट’ ACI जिसे ‘ट्रेड बाजुका’ कहा जा रहा है, को चलाने के संकेत दे दिए हैं।
विवाद की जड़: क्या है ट्रंप का ग्रीनलैंड प्लान
राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए ग्रीनलैंड का अमेरिकी नियंत्रण में होना उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। शनिवार को ट्रंप ने घोषणा की कि:1 फरवरी 2026 से: डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, फिनलैंड, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और यूके से आने वाले सामानों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा।1 जून 2026 से: यदि तब तक ‘डील’ नहीं होती, तो इस टैरिफ को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि सुरक्षा के लिए वे ‘बल प्रयोग’ की संभावना से भी पीछे नहीं हटेंगे।
क्या है यूरोपीय संघ का ट्रेड बाजुका ACI
यूरोपीय संघ ने 2023 में एक विशेष कानून बनाया था जिसे एंटी-कोर्शन इंस्ट्रूमेंट कहा जाता है। इसे ‘ट्रेड बाजुका’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह EU को किसी भी देश के खिलाफ सामूहिक और कड़ी आर्थिक कार्रवाई करने की शक्ति देता है।
इसके तहत EU क्या कर सकता है
प्रतिशोधी टैरिफ: अमेरिकी उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाना। बाजार पर प्रतिबंध: अमेरिकी कंपनियों को यूरोपीय सिंगल मार्केट से बाहर करना या उन पर सीमाएं लगाना। सरकारी टेंडर पर रोक: अमेरिकी फर्मों को EU के किसी भी सरकारी प्रोजेक्ट या टेंडर में हिस्सा लेने से रोकना बौद्धिक संपदा IPअधिकार: अमेरिकी कंपनियों के आईपी अधिकारों या सेवाओं पर प्रतिबंध लगाना।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: ‘खतरनाक मोड़ पर दुनिया
इस टकराव ने नाटो NATO सहयोगियों के बीच दरार पैदा कर दी है: यूरोपीय आयोग उर्सुला वॉन डेर लेयेन उन्होंने चेतावनी दी है कि ट्रंप के ये कदम ट्रांसअटलांटिक संबंधों को “खतरनाक और कभी न सुधरने वाले विनाशकारी मोड़” पर ले जाएंगे। ब्रिटेन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर उन्होंने ट्रंप से फोन पर बात कर इसे ‘पूरी तरह गलत’ बताया और कहा कि नाटो सहयोगियों के खिलाफ टैरिफ का इस्तेमाल अस्थिरता पैदा करेगा।फ्रांस इमैनुएल मैक्रों:फ्रांस इस ‘ट्रेड बाजुका’ को चलाने के पक्ष में सबसे मुखर है, उनका तर्क है कि संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
आगे क्या होगा
आगे क्या होगा
फिलहाल ब्रसेल्स में यूरोपीय देशों के राजदूतों की आपातकालीन बैठकें चल रही हैं। यदि 1 फरवरी से ट्रंप अपने टैरिफ लागू करते हैं, तो दुनिया एक ऐसी ‘ट्रेड वॉर’ देखेगी जिसकी मिसाल आधुनिक इतिहास में नहीं मिलती। ग्रीनलैंड की बर्फ पर शुरू हुई यह जंग अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को पिघलाने की कगार पर है।
