शिवपुरी– शिवपुरी जिलान्तर्गत आने वाली करैरा और नरवर तहसील में दो दिनों से हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। यहाँ के पचास से भी अधिक गौवों में कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल पर अचानक हुई बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।ग्राम करही निवासी श्रीनिवास रावत का कहना है कि हमारे गाँव दो दिनों से अधिक वारिस होने से धान की फसल पूरी तरह खेतों में ही बिछ गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
खेतों में जलभराव और फसल का नुकसान-
तेज हवाओं के कारण धान के पौधे गिर गए हैं और बालियाँ टूट गई हैं।
खेतों में पानी भर जाने से कई जगहों पर धान की फसल पानी में डूब गई है, जिससे जड़ें सड़ रही हैं।
बारिश के कारण कटे हुए धान की ढेरियाँ भीग गई हैं। इस वजह से दानों का रंग काला पड़ गया है और कहीं कहीं कटी हुई फसल पर पानी पड़ जाने से खेतों में ही फसल पुनः अंकुरित होने लगी है।
किसानों को बिक्री में दिक्कत और कम कीमत मिलने की चिंता-
नमी की अधिक मात्रा होने के कारण व्यापारी भीगे हुए धान को खरीदने से मना कर रहे हैं।
किसानों को डर है कि अगर धान की खरीद हुई भी तो उन्हें कम कीमत मिलेगी, जिससे उनकी लागत भी नहीं निकल पाएगी।
सरकार से मुआवजे की उम्मीद-
परेशान किसानों ने किसान कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम रावत ने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द फसल के नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही धूप नहीं निकली तो नुकसान और बढ़ सकता है।
बारिश के कारण फसलों में कीड़े और फफूंद लगने की संभावना भी बढ़ गई है, जिससे उपज की गुणवत्ता और भी खराब हो सकती है।
ग्राम सिलरा निवासी रानू सोलंकी का कहना है कि एक तरफ खेती की लागत बढ़ रही है और दूसरी तरफ मौसम की मार उनकी मेहनत पर पानी फेर देती है। अब उन्हें सरकार से मदद का इंतजार है ताकि वे इस संकट से उबर सकें।
