खंडवा । खंडवा में ₹52 करोड़ की लागत से स्वीकृत बहुप्रतीक्षित पंधाना रोड का भूमिपूजन आज (बुधवार, 26 नवंबर) लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह द्वारा किया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट का श्रेय लेने की होड़ में खंडवा विधायक कंचन तनवे की सोशल मीडिया पोस्ट हास्यास्पद विवाद का कारण बन गई।
विधायक तनवे ने मंत्री के साथ अपनी फोटो लगाकर एक पोस्टर शेयर किया, जिसमें पंधाना रोड की स्वीकृति के लिए किए गए प्रयासों का दावा किया गया था। लेकिन, सोशल मीडिया यूजर्स ने जब पोस्टर को ज़ूम किया, तो पता चला कि विधायक द्वारा संलग्न किया गया पत्र पंधाना रोड की मांग से नहीं, बल्कि अन्यत्र नाली और पुलिया निर्माण की मांग से जुड़ा हुआ था।
श्रेय की जल्दबाजी में गलत ‘चिट्ठी’
विधायक तनवे की यह पोस्ट उनकी किरकिरी का कारण बन गई।विधायक ने दावा किया कि उन्होंने मंत्री राकेश सिंह से मुलाकात कर पंधाना रोड की स्वीकृति के लिए पत्र दिया था।
हकीकत यह थी कि पत्र एक अन्य सड़क पर किसानों के खेतों में भर रहे पानी की निकासी के लिए पुलिया निर्माण के लिए लिखा गया था।श्रेय लेने की जल्दबाजी में विधायक ने एक गलत सड़क का पत्र और एक दूसरे काम का आवेदन एक ही पोस्टर में चिपका दिया।
सोशल मीडिया पर विधायक को लोगों ने घेरा
यह पंधाना रोड वास्तव में पंधाना विधानसभा क्षेत्र (जिसकी विधायक छाया मोरे हैं) से जुड़ा है। ऐसे में खंडवा विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने अपनी विधायक कंचन तनवे को उन्हीं की पोस्ट पर घेर लिया और तीखे कमेंट किए।लोगों ने पूछा कि जब आपके खुद के क्षेत्र का मूंदी रोड खस्ताहाल है और वहाँ रोजाना हादसे होते हैं, तो वह क्यों नहीं बन रहा?
लोगों ने तंज कसते हुए कहा, आप हफ्ते में एक बार मुख्यमंत्री से मिलने भोपाल जाती हैं, फिर भी अपने क्षेत्र का रोड स्वीकृत नहीं करवा पाईं। अब दूसरे क्षेत्र की विधायक की मेहनत पर डाका डालने की कोशिश क्यों कर रही हैं?खंडवा विधानसभा में आने वाले 32 किलोमीटर लंबे खस्ताहाल मूंदी रोड का 25 किलोमीटर हिस्सा आज भी बदहाल है।
आज इन कार्यों का करेंगे भूमिपूजन
विवादों के बावजूद, पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह आज जिले को करोड़ों के विकास कार्यों की सौगात देंगे:
ओंकारेश्वर: ₹18.81 करोड़ की लागत से बर्फानी आश्रम से मंदिर मार्ग पर पहुंच मार्ग और 3 छोटे पुलों का निर्माण।
सर्किट हाउस: ₹8.49 करोड़ की लागत से नए सर्किट हाउस का निर्माण।
ग्रामीण सड़कें: चिचगोहन से खेरदा (₹6.23 करोड़) और सिरसोद से भीलखेड़ी फाटा (₹3.49 करोड़) के बीच सड़क निर्माण।
मध्य प्रदेश में सड़क परियोजना स्वीकृति की प्रक्रिया
किसी भी नई सड़क परियोजना या चौड़ीकरण को लागू करने से पहले निम्नलिखित तीन प्रमुख चरणों से गुजरना होता है:
1. तकनीकी और प्रारंभिक चरण (Feasibility & DPR)
चरण जिम्मेदारी विवरण
आवश्यकता आकलन-PWD (क्षेत्रीय इकाई)-स्थानीय विधायक, जिला प्रशासन या यातायात सर्वे के आधार पर सड़क की आवश्यकता का आकलन किया जाता है।
डीपीआर (DPR)-PWD या कंसल्टेंट-विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (Detailed Project Report) तैयार की जाती है। इसमें सड़क का लेआउट, अनुमानित लागत, मिट्टी की जांच और इंजीनियरिंग डिजाइन शामिल होते हैं।
तकनीकी स्वीकृति PWD के मुख्य अभियंता-DPR की इंजीनियरिंग मानकों के आधार पर तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) की जांच की जाती है और आवश्यक तकनीकी स्वीकृति दी जाती है।
2. प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति चरण
वन/पर्यावरण मंजूरी वन विभाग-यदि परियोजना में पेड़ काटने या वन भूमि का उपयोग शामिल है (जैसा कि भोजपुर मामले में था), तो वन विभाग और पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) समिति से मंजूरी लेना अनिवार्य होता है।
वित्तीय अनुमोदन-वित्त विभाग परियोजना की अनुमानित लागत की जांच की जाती है। विभाग यह सुनिश्चित करता है कि परियोजना के लिए बजट उपलब्ध है या नहीं।
प्रशासनिक स्वीकृति-राज्य सरकार (कैबिनेट/विभाग)बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए, अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति राज्य कैबिनेट या संबंधित मंत्रालय (जैसे PWD मंत्री) द्वारा दी जाती है। इस मंजूरी के बाद ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होती है।
3. निविदा और क्रियान्वयन (Tender & Execution)
निविदा (Tender): प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद, PWD द्वारा निर्माण कार्य के लिए टेंडर जारी किया जाता है। यह सबसे कम बोली लगाने वाली योग्य निर्माण कंपनी को दिया जाता है।
यदि सड़क चौड़ीकरण के लिए निजी भूमि की आवश्यकता होती है, तो भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत किसानों और भूस्वामियों को मुआवजा देकर भूमि अधिग्रहित की जाती है।
सफल ठेकेदार (Contractor) द्वारा PWD की निगरानी में निर्माण कार्य शुरू किया जाता है।
भोजपुर मामले में PWD पर आरोप था कि उन्होंने वन/पर्यावरण मंजूरी और NGT द्वारा गठित कमेटी की अनुमति के बिना ही 488 पेड़ काट दिए, जिससे कानूनी जटिलताएँ उत्पन्न हुईं।
